पीएम किसान योजना के 7 साल पूरे हो गए हैं। सरकार की ओर से यह योजना साल 2019 में 24 फरवरी को शुरू की गई थी। तब से अभी तक पीएम किसान की 21 किस्त आ चुकी है और अब करीब 9 करोड़ किसानों को 22वीं किस्त का इंतजार है।
पीएम किसान योजना के तहत किसानों को मिलने वाली आर्थिक सहायता की अगली यानी 22वीं किस्त का किसान बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। इससे पहले योजना की 21वीं किस्त नवंबर 2025 में किसानों के बैंक खातों में भेजी गई थी। ऐसे में अब चार महीने का समय पूरा होने के कारण फरवरी-मार्च 2026 के बीच अगली किस्त आने की उम्मीद जताई जा रही थी हालांकि बजट 2026 के बाद भी किसानों के खाते में यह राशि नहीं पहुंची और अब होली भी निकल ही रही है जिससे किसानों के मन में सवाल उठ रहा है कि आखिर इस बार किस्त में देरी क्यों हो रही है।
इस बार किस्त में देरी का सबसे बड़ा कारण फार्मर आईडी को अनिवार्य किया जाना माना जा रहा है। सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि अब पीएम किसान योजना सहित अन्य कृषि योजनाओं का लाभ लेने के लिए किसान पहचान पत्र या फार्मर आईडी होना जरूरी होगा। इसका उद्देश्य असली और पात्र किसानों की सही पहचान करना है ताकि योजना का लाभ सही लोगों तक ही पहुंचे।
फार्मर आईडी बनाने के लिए सरकार द्वारा ब्लॉक, पंचायत और जिला स्तर पर विशेष शिविर आयोजित किए जा रहे हैं। इसके बावजूद बड़ी संख्या में किसानों का फार्मर आईडी अभी तक नहीं बन पाया है। इसके लिए कोई अंतिम तारीख घोषित नहीं की गई है, जिसके कारण कई किसान इस प्रक्रिया को गंभीरता से नहीं ले रहे हैं। सरकार ने संकेत दिया है कि जिन किसानों की फार्मर आईडी पूरी नहीं होगी, उन्हें किस्त जारी करने में देरी हो सकती है।
किस्त में देरी की दूसरी प्रमुख वजह योजना में हो रही गड़बड़ियों की जांच है। सरकार को जानकारी मिली थी कि कई अपात्र लोग भी पीएम किसान योजना का लाभ उठा रहे थे। कुछ मामलों में एक ही जमीन के आधार पर कई लोगों ने किस्त प्राप्त की थी। अब सरकार ऐसे मामलों की जांच कर रही है और अपात्र लाभार्थियों को सूची से हटाया जा रहा है।
जांच के दौरान कई राज्यों में बड़ी संख्या में किसानों की किस्त अस्थायी रूप से रोक दी गई है। उदाहरण के तौर पर उत्तर प्रदेश में ही करीब 19 लाख किसानों की 22वीं किस्त पर रोक लगाई गई है। सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि केवल योग्य किसानों को ही योजना का लाभ मिले।
फार्मर आईडी के अलावा ई-केवाईसी पूरी न होना भी किस्त में देरी का एक बड़ा कारण है। ग्रामीण क्षेत्रों में कई किसान अभी तक केवाईसी प्रक्रिया पूरी नहीं कर पाए हैं। अधिकांश किसान कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) पर निर्भर हैं, जहां भीड़ अधिक होने के कारण प्रक्रिया धीमी हो रही है। जब तक केवाईसी पूरी नहीं होगी, तब तक किस्त जारी होने में परेशानी हो सकती है।
सरकार द्वारा किए जा रहे सत्यापन और दस्तावेजों की जांच के कारण कुछ किसानों की 22वीं किस्त अस्थायी रूप से रुक सकती है। हालांकि इससे घबराने की जरूरत नहीं है। जिन किसानों की किस्त इस बार नहीं आएगी, उन्हें अगली यानी 23वीं किस्त के साथ एकमुश्त भुगतान मिलने की संभावना है।
फिलहाल सरकार की ओर से 22वीं किस्त की कोई आधिकारिक तारीख घोषित नहीं की गई है। लेकिन अनुमान लगाया जा रहा है कि होली 2026 के बाद किसानों के खाते में किस्त ट्रांसफर की जा सकती है।
आमतौर पर योजना के तहत हर चार महीने में एक किस्त जारी की जाती है और मार्च 2026 में यह अवधि पूरी हो रही है। ऐसे में उम्मीद है कि इसी महीने किसानों को राहत मिल सकती है।