हालांकि कुछ इलेक्ट्रिशियन की बात मान लें तो ज्यादातर मामलों में पंखे की क्वॉइल या मोटर खराब नहीं होते हैं, बल्कि इसकी वजह सिर्फ एक छोटा-सा कंडेंशर होता है, जिसे बदलकर पंखे की स्पीड फिर से तेज की जा सकती है।
कंडेंसर पंखे का एक छोटा इलेक्ट्रॉनिक पार्ट होता है, जो मोटर को सही पावर देने में मदद करता है। इसे कैपेसिटर भी कहा जाता है। समय के साथ इसकी क्षमता कम होने लगती है, जिससे पंखा धीरे घूमने लगता है। खास बात यह है कि बाजार में यह पार्ट सिर्फ 30 से 50 रुपये के बीच आसानी से मिल जाता है।
अगर पंखा आवाज किए बिना सिर्फ धीमा चल रहा है, तो सबसे पहले उसका कंडेंसर चेक कराना चाहिए। नया कंडेंसर लगाने के बाद कई पुराने पंखे भी नए जैसे तेज चलने लगते हैं। यही वजह है कि लोग अब नया पंखा खरीदने की बजाय छोटी मरम्मत कराकर पैसे बचा रहे हैं।
धीमी स्पीड वाला पंखा कई बार ज्यादा बिजली खपत करने लगता है क्योंकि मोटर पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। सही कंडेंसर लगने से मोटर बेहतर तरीके से काम करती है और बिजली की खपत भी नियंत्रित रहती है। ऐसे में यह छोटा खर्च बिजली बिल कम करने में भी मदद कर सकता है।
हालांकि कंडेंसर बदलना आसान माना जाता है, लेकिन बिजली से जुड़ा काम होने के कारण सावधानी बेहद जरूरी है। किसी भी मरम्मत से पहले मेन स्विच बंद करना चाहिए। अगर तकनीकी जानकारी न हो, तो इलेक्ट्रिशियन की मदद लेना ज्यादा सुरक्षित रहता है।
कई यूट्यूब वीडियोज में आपने देखा होगा कि एक ही पंखे में दो कंडेंसर लगाए गए हैं जिसकी स्पीड बढ़ गई है। दो कंडेंसर लगाने से स्पीड तो बढ़ जाती है लेकिन मोटर और क्वॉयल के जलने की संभावना होती है। बेहतर होगा कि एक ही कंडेंसर का इस्तेमाल करें। आप 2.5 से 3.5 एंपीयर का कंडेंसर इस्तेमाल कर सकते हैं।
सिर्फ कंडेंशर बदलने से कई बार 20 से 50 साल पुराने पंखे भी सिर्फ छोटे मेंटेनेंस से शानदार स्पीड देने लगते हैं। नियमित सफाई, ऑयलिंग और सही कंडेंशर का इस्तेमाल पंखे की उम्र बढ़ाने में मदद करता है।