DGCA द्वारा नवंबर में जारी ‘डेंजरस गुड्स एडवाइजरी सर्कुलर’ के अनुसार, पावर बैंक और अतिरिक्त बैटरियां केवल हैंड बैगेज में ही ले जाई जा सकेंगी। इन्हें ओवरहेड लगेज कम्पार्टमेंट में रखने की अनुमति नहीं होगी। नियामक का कहना है कि ऐसी जगहों पर आग लगने की स्थिति में उसका पता लगाना और उस पर काबू पाना मुश्किल हो जाता है।
DGCA ने चेतावनी दी है कि लिथियम बैटरी से लगने वाली आग बेहद खतरनाक होती है। ये बैटरियां अत्यधिक ऊर्जा वाली होती हैं और कई बार आग खुद-ब-खुद बुझती नहीं है। अधिक गर्म होने, ओवरचार्जिंग, दबाव पड़ने या खराब निर्माण गुणवत्ता के कारण इनमें आग लग सकती है। कुछ मामलों में ये बैटरियां विस्फोट तक कर सकती हैं, जिससे यात्रियों और विमान की सुरक्षा को गंभीर खतरा होता है।
एडवाइजरी में बताया गया है कि अगर लिथियम बैटरियां ओवरहेड बिन या बंद बैग में रखी जाती हैं, तो उनसे निकलने वाला धुआं या आग देर से दिखाई देती है। इससे समय पर कार्रवाई नहीं हो पाती और खतरा कई गुना बढ़ जाता है। सबसे बड़ी बात यह है कि आप अपने साथ सिर्फ 100 वॉट से कम क्षमता वाले पावर बैंक यानी करीब 27000mAh तक के पावर क साथ लेकर फ्लाइट में जा सकते हैं। इससे बड़ा पावर बैंक को बैगेज में भी अलाउ नहीं होगा।
DGCA ने सभी एयरलाइंस को निर्देश दिया है कि वे यात्रियों द्वारा लाई जा रही लिथियम बैटरियों से जुड़े सुरक्षा जोखिमों की दोबारा समीक्षा करें। साथ ही केबिन में आग की जल्दी पहचान और प्रभावी फायरफाइटिंग के लिए अतिरिक्त उपाय अपनाने को कहा गया है।
नए नियमों में केबिन क्रू की ट्रेनिंग को भी अहम बताया गया है। क्रू मेंबर्स को ओवरहीटिंग, धुआं या आग के शुरुआती संकेत पहचानने, सही फायरफाइटिंग उपकरण इस्तेमाल करने और धुएं से होने वाले खतरे समझने की ट्रेनिंग दी जाएगी। यह भी सुनिश्चित करने को कहा गया है कि विमान में जरूरी सुरक्षा उपकरण आसानी से उपलब्ध हों।
DGCA ने यात्रियों को जागरूक करने के लिए फ्लाइट के दौरान अनिवार्य घोषणाएं करने का निर्देश दिया है। यात्रियों से कहा गया है कि अगर किसी डिवाइस से गर्मी, धुआं या अजीब गंध आए तो तुरंत केबिन क्रू को सूचना दें।
एयरपोर्ट ऑपरेटरों को भी इस मुहिम में शामिल किया गया है। DGCA ने टर्मिनल एंट्री, चेक-इन काउंटर, सिक्योरिटी चेक और बोर्डिंग गेट पर लिथियम बैटरी से जुड़े खतरे बताने वाले संदेश और वीडियो दिखाने को कहा है।
केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री के. राम मोहन नायडू ने कहा कि DGCA द्वारा बनाए गए सभी नियम यात्रियों और विमान की सुरक्षा को ध्यान में रखकर तय किए जाते हैं। अंतरराष्ट्रीय मानकों और विशेषज्ञों से सलाह के बाद ही ऐसे फैसले लिए जाते हैं, जिनका पालन सभी के लिए जरूरी है।