कई यात्रियों को लगता है कि Confirm Ticket होने के बाद सीट पूरी तरह सुरक्षित हो जाती है, लेकिन रेलवे के कुछ नियमों के तहत कुछ परिस्थितियों में आपकी सीट किसी दूसरे यात्री को अलॉट की जा सकती है।
कन्फर्म टिकट का मतलब है कि सीट आपके नाम पर आरक्षित है, लेकिन कुछ विशेष परिस्थितियों में सीट आगे किसी अन्य यात्री को दी जा सकती है। रेलवे में सीट आवंटन की प्रक्रिया तय नियमों के अनुसार होती है और TTE के पास भी कुछ परिस्थितियों में सीट दोबारा अलॉट करने का अधिकार होता है।
अगर कोई यात्री अपने बोर्डिंग स्टेशन से ट्रेन में नहीं चढ़ता है और इसकी जानकारी रेलवे रिकॉर्ड में दर्ज हो जाती है, तो उसे No Show Passenger माना जा सकता है। ऐसी स्थिति में TTE आपकी सीट को खाली मानकर किसी अन्य पात्र यात्री को आवंटित कर सकता है। इसलिए अगर किसी कारण से आप बोर्डिंग स्टेशन से ट्रेन नहीं पकड़ पा रहे हैं, तो पहले से बोर्डिंग स्टेशन बदलवाना जरूरी हो सकता है।
अगर यात्री अपने तय बोर्डिंग स्टेशन पर ट्रेन में नहीं चढ़ता और पहले से Boarding Change नहीं करवाया है, तो उसकी सीट किसी अन्य यात्री को दी जा सकती है। रेलवे नियमों के अनुसार, TTE ट्रेन में मौजूद यात्रियों की स्थिति और उपलब्ध सीटों के आधार पर सीट का आवंटन करता है।
ट्रेन में TTE के पास हैंड हेल्ड टर्मिनल (HHT) डिवाइस होता है, जिसमें यात्रियों और सीटों का रिकॉर्ड दर्ज रहता है। किसी भी यात्री की सीट किसी दूसरे व्यक्ति को देने से पहले TTE को सिस्टम में इसकी प्रक्रिया पूरी करनी होती है। बिना रिकॉर्ड अपडेट किए सीट अलॉट नहीं की जा सकती।
अगर कोई सीट खाली हो जाती है, तो रेलवे नियमों के अनुसार RAC यात्रियों, आंशिक रूप से कन्फर्म यात्रियों या अन्य पात्र यात्रियों को वह सीट दी जा सकती है। इसलिए कन्फर्म टिकट वाले यात्रियों को भी समय पर ट्रेन में पहुंचना जरूरी होता है, ताकि सीट किसी अन्य यात्री को आवंटित न हो जाए।
रेल यात्रा के दौरान टिकट कन्फर्म होने के बावजूद बोर्डिंग समय और रेलवे के नियमों का ध्यान रखना जरूरी है। इससे आपकी यात्रा बिना किसी परेशानी के पूरी हो सकती है।