Birth Certificate Name Change Rules and Process : ज्यादातर लोगों को लगता है कि जन्म प्रमाणपत्र में नाम बदलना नामुमकिन है। लेकिन, कानून में इसके लिए व्यवस्था दी गई हैं। यह एक ऐसी मुश्किल है, जिसका सामना अक्सर कई पेरेंट्स को करना पड़ता है। अगर आप भी इससे जुड़े सवालों के जवाब खोज रहे हैं, तो यहां स्टेप बाई स्टेप बताया गया है कि कैसे आप बर्थ सर्टिफिकेट में बच्चे का नाम बदलवा सकते हैं। इसके अलावा Spelling Correction, बिना नाम वाले Certificate में नाम जोड़ना और पूरा नया नाम दर्ज कराना। तीनों की क्या प्रक्रिया होती है।
हां, भारत में बच्चे के जन्म प्रमाणपत्र में नाम बदलना संभव है। लेकिन सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि मामला किस तरह का है। अगर जन्म के समय नाम दर्ज नहीं हुआ था, तो बाद में नाम जोड़ा जा सकता है। अगर स्पेलिंग या टायपिंग मिस्टेक है, तो करेक्शन कराया जा सकता है। लेकिन अगर पहले से दर्ज नाम हटाकर पूरी तरह नया नाम लिखवाना है, तो प्रक्रिया थोड़ी अलग और सख्त हो सकती है। हर मामले में आवेदन उसी रजिस्ट्रार कार्यालय में करना होता है, जहां बच्चे का जन्म दर्ज हुआ था। पूरी प्रक्रिया राज्य सरकारों के नियमों और स्थानीय प्रशासन के जरिए पूरी होती है।
नाम से जुड़े मामलों को आम तौर पर तीन हिस्सों में बांटा जाता है। पहला, जन्म प्रमाणपत्र में बच्चे का नाम नहीं लिखा गया। दूसरा, नाम गलत लिखा गया है और सिर्फ स्पेलिंग सुधारनी है। तीसरा, पहले से दर्ज नाम हटाकर बिल्कुल नया नाम लिखवाना है। यही सबसे अहम फर्क है, क्योंकि इसी आधार पर पूरी प्रक्रिया तय होती है। अगर सिर्फ टायपिंग एरर है तो प्रक्रिया आसान रहती है। लेकिन पूरा नया नाम दर्ज कराने पर Registrar ज्यादा जांच कर सकता है और अतिरिक्त दस्तावेज भी मांग सकता है। इसलिए आवेदन से पहले अपना मामला सही तरीके से समझना जरूरी होता है।
कई बार बच्चे का जन्म प्रमाणपत्र बिना नाम के बन जाता है, क्योंकि जन्म के समय परिवार ने नाम तय नहीं किया होता। ऐसे मामलों में बाद में बच्चे का नाम जुड़वाया जा सकता है। इसके लिए माता-पिता को आवेदन देना होता है और बच्चे की जानकारी, माता-पिता के दस्तावेज और पुराने जन्म प्रमाणपत्र की कॉपी जमा करनी पड़ सकती है। कई राज्यों में तय समय सीमा के भीतर नाम जोड़ने की प्रक्रिया आसान रहती है। बाद में नाम जुड़वाने पर अतिरिक्त फीस और वेरिफिकेशन हो सकता है। मंजूरी मिलने के बाद नया अपडेटेड जन्म प्रमाणपत्र जारी कर दिया जाता है।
अगर बच्चे का नाम गलत छप गया है, अक्षर की गलती है या टायपिंग एरर है, तो इसे करेक्शन माना जाता है। मसलन, “Aarav” की जगह “Arav” लिखा हो। ऐसे मामलों में आम तौर पर अस्पताल रिकॉर्ड, माता-पिता के दस्तावेज, आधार या स्कूल रिकॉर्ड के आधार पर सुधार कराया जा सकता है। इसके लिए उसी रजिस्ट्रार कार्यालय में आवेदन देना होता है जहां जन्म दर्ज हुआ था। इस तरह के मामलों में आम तौर पर प्रक्रिया आसान रहती है और कई बार एफिडेविट या गजट की जरूरत भी नहीं पड़ती। रिकॉर्ड जांचने के बाद रजिस्ट्राट करेक्ट नाम के साथ सर्टिफिकेट जारी कर सकता है।
अगर जन्म प्रमाणपत्र में पहले से दर्ज नाम हटाकर बिल्कुल नया नाम लिखवाना है, तो मामला सामान्य करेक्शन का नहीं माना जाता। ऐसे मामलों में रजिस्ट्रार यह देखता है कि सिर्फ गलती सुधारी जा रही है या बच्चे की पहचान से जुड़ा बड़ा बदलाव किया जा रहा है। इसी वजह से कई बार एफिडेविट, घोषणापत्र, अखबार में प्रकाशन या गजट प्रकाशन जैसे दस्तावेज मांगे जा सकते हैं। हालांकि, कानून सीधे हर मामले में इन्हें अनिवार्य नहीं बनाता। छोटे बच्चों के मामलों में प्रक्रिया आसान हो सकती है, लेकिन अगर स्कूल, आधार या पासपोर्ट में पुराना नाम इस्तेमाल हो चुका है, तो सभी रिकॉर्ड में बदलाव जरूरी हो सकता है।
भारत में जन्म और मृत्यु पंजीकरण के लिए Registration of Births and Deaths Act, 1969 पूरे देश में लागू है, लेकिन यह कानून राज्यों को अपनी प्रक्रिया और नियम बनाने का अधिकार भी देता है। इसी वजह से अलग-अलग राज्यों में बर्थ सर्टिफिकेट में नाम बदलने या सुधार की प्रक्रिया, दस्तावेज, फीस और अप्रूवल सिस्टम अलग हो सकते हैं। कहीं, शपथपत्र मांगा जाता है, कहीं सिर्फ घोषणापत्र से काम हो जाता है, जबकि कुछ राज्यों में गजट पब्लिकेशन भी जरूरी माना जाता है। चूंकि जन्म पंजीकरण का काम नगर निगम, नगर पालिका और पंचायत जैसी लोकल बॉडीज करती हैं, इसलिए प्रशासनिक व्यवस्था और वेरिफिकेशन प्रॉसेस भी राज्यों के हिसाब से बदल जाता है।
पहली, स्पेलिंग करेक्शन और पूरा नाम बदलना अलग प्रक्रियाएं हैं। दूसरी, कानून सीधे हर मामले में गजट या एफिडेविट जरूरी नहीं कहता, लेकिन अधिकारी इन्हें मांग सकते हैं। तीसरी, बच्चे के बाकी दस्तावेजों में भी वही नाम होना जरूरी है। चौथी, जितनी जल्दी बदलाव कराया जाए, प्रक्रिया उतनी आसान रहती है। पांचवीं, आवेदन हमेशा उसी रजिस्ट्रार र्यालय में करें जहां जन्म दर्ज हुआ था। अगर दस्तावेज सही हैं और रिकॉर्ड में विरोधाभास नहीं है, तो नाम बदलने या सुधार की प्रक्रिया आम तौर पर पूरी हो जाती है और नया बर्थ सर्टिफिकेट जारी कर दिया जाता है।