पहाड़ी इलाकों से गुजरने के कारण इस रेल लाइन का बड़ा हिस्सा सुरंगों और पुलों से होकर गुजरेगा। परियोजना के तहत 62 सुरंगें बनाई जाएंगी, जिनकी कुल लंबाई लगभग 270 किलोमीटर होगी। यानी पूरी रेलवे लाइन का करीब 55 प्रतिशत हिस्सा टनलों से होकर गुजरेगा। इसके अलावा इस मार्ग पर 116 बड़े पुल भी बनाए जाएंगे, जो गहरी घाटियों और नदियों को पार करने में मदद करेंगे।
इस रेलवे लाइन की कुल लंबाई लगभग 489 किलोमीटर होगी। पूरे मार्ग पर करीब 40 रेलवे स्टेशन बनाए जाने की योजना है। प्रमुख स्टेशनों में बिलासपुर, सुंदरनगर, मंडी, मनाली, केलंग, दारचा, सरचू, पांग, तेंगला और लेह शामिल होंगे। यह परियोजना हिमालय के कई दुर्गम क्षेत्रों को पहली बार रेल नेटवर्क से जोड़ने का काम करेगी।
इस परियोजना की सबसे खास बात यह है कि यहां बनने वाला Tengla Railway Station दुनिया का सबसे ऊंचा रेलवे स्टेशन हो सकता है। यह स्टेशन समुद्र तल से लगभग 5,359 मीटर की ऊंचाई पर प्रस्तावित है।
पूरी रेल लाइन का अधिकतम ऊंचाई स्तर 15,000 फीट से अधिक होगा, जो इसे दुनिया की सबसे ऊंचाई पर चलने वाली रेल परियोजनाओं में शामिल करेगा।
इस मार्ग पर चलने वाली ट्रेनों की अधिकतम गति लगभग 100 किलोमीटर प्रति घंटा रहने का अनुमान है। इस रेलवे लाइन के बनने से दिल्ली से लेह तक की यात्रा में बड़ा बदलाव आएगा। फिलहाल सड़क मार्ग से यह सफर करीब 40 घंटे तक लग सकता है, लेकिन रेल लाइन बनने के बाद यही दूरी लगभग 20 घंटे में तय की जा सकेगी।
ऊंचाई वाले क्षेत्रों में कम ऑक्सीजन और अत्यधिक ठंड को ध्यान में रखते हुए ट्रेनों में विशेष सुविधाएं देने की योजना है। यात्रियों को प्रेशराइज्ड कोच मिलेंगे, जो हवाई जहाज की तरह काम करेंगे। इसके साथ ही ट्रेनों में हाई-टेक हीटिंग सिस्टम भी लगाया जाएगा, ताकि बेहद ठंडे मौसम में भी सफर आरामदायक रहे।
इस महत्वाकांक्षी परियोजना की अनुमानित लागत लगभग 1.31 लाख करोड़ रुपये बताई जा रही है। इस रेलवे लाइन की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) रक्षा मंत्रालय को सौंप दी गई है। अब अंतिम मंजूरी मिलने के बाद ही इस परियोजना के निर्माण कार्य को आगे बढ़ाया जाएगा। विशेषज्ञों के अनुसार यह रेल लाइन बनने के बाद लद्दाख क्षेत्र में कनेक्टिविटी, पर्यटन और सामरिक मजबूती तीनों को बड़ा लाभ मिलेगा।