नेपाल में हाल ही में आई भीषण बाढ़ और भूस्खलन ने कई इलाकों में भारी तबाही मचाई है। प्राकृतिक आपदा के कारण लोगों के घरों और संपत्ति को नुकसान पहुंचा है, जबकि कई परिवारों का घरेलू सामान पानी में बह गया या पूरी तरह खराब हो गया। ऐसे हालात में एक बड़ा सवाल सामने आता है कि अगर बाढ़ में घर का सामान बह जाए या पानी से खराब हो जाए, तो क्या उसका इंश्योरेंस क्लेम मिल सकता है? इसका जवाब सीधे तौर पर इस बात पर निर्भर करता है कि आपकी होम इंश्योरेंस पॉलिसी में किस तरह का कवरेज शामिल है और नुकसान किस परिस्थिति में हुआ है।
कैसे होता है होम इंश्योरेंस?
आमतौर पर होम इंश्योरेंस में मकान की संरचना और घर के अंदर मौजूद सामान का कवरेज अलग-अलग हो सकता है। कुछ पॉलिसियां केवल भवन के ढांचे, जैसे दीवार, छत और फर्श को हुए नुकसान को कवर करती हैं, जबकि घर के अंदर रखे टीवी, फ्रिज, फर्नीचर, कपड़े, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और अन्य सामान के लिए अलग से Contents Insurance या व्यापक होम इंश्योरेंस कवरेज की जरूरत हो सकती है। ऐसे में यदि किसी व्यक्ति की पॉलिसी में केवल मकान या भवन का स्ट्रक्चरल कवरेज शामिल है, तो घरेलू सामान के नुकसान का क्लेम मिलना जरूरी नहीं है। वहीं, अगर पॉलिसी में घरेलू सामान का कवरेज शामिल है और बाढ़ से होने वाला नुकसान पॉलिसी के तहत कवर है, तो शर्तों और तय Sum Insured के अनुसार क्लेम किया जा सकता है।
एक जैसी नहीं होतीं शर्तें
बाढ़, जलभराव और अन्य प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले नुकसान का कवरेज कई होम या प्रॉपर्टी इंश्योरेंस पॉलिसियों में शामिल हो सकता है। हालांकि, हर पॉलिसी की शर्तें एक जैसी नहीं होतीं। कुछ पॉलिसियों में विशेष जोखिम शामिल होते हैं, जबकि कुछ में कुछ परिस्थितियों या सामान को कवरेज से बाहर रखा जा सकता है। इसलिए किसी भी नुकसान के बाद सबसे पहले अपनी इंश्योरेंस पॉलिसी के नियम, कवरेज और एक्सक्लूजन को ध्यान से देखना जरूरी होता है।
नुकसान होने के बाद इंश्योरेंस कंपनी को जल्द से जल्द इसकी सूचना देना भी बेहद महत्वपूर्ण है। हर पॉलिसी में क्लेम की सूचना देने की समय-सीमा और प्रक्रिया अलग हो सकती है, इसलिए यह मान लेना सही नहीं होगा कि सभी मामलों में केवल 24 या 72 घंटे के भीतर ही सूचना देना अनिवार्य है। बेहतर होगा कि पॉलिसीधारक नुकसान की जानकारी तुरंत या जल्द से जल्द कंपनी को दे और अपनी पॉलिसी में तय नियमों का पालन करे।
क्लेम की प्रक्रिया में नुकसान के सबूत भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। स्थिति सुरक्षित होने के बाद घर और क्षतिग्रस्त सामान की फोटो और वीडियो बना लेनी चाहिए। यदि सामान के खरीद बिल, इनवॉइस, वारंटी कार्ड या अन्य संबंधित दस्तावेज उपलब्ध हैं, तो उन्हें सुरक्षित रखना चाहिए। इंश्योरेंस कंपनी मामले और पॉलिसी की शर्तों के आधार पर स्थानीय प्रशासन की रिपोर्ट, पुलिस रिपोर्ट या अन्य जरूरी दस्तावेज भी मांग सकती है।
सर्वेयर करेगा जांच
क्लेम दर्ज होने के बाद इंश्योरेंस कंपनी नुकसान का आकलन करने के लिए Surveyor नियुक्त कर सकती है। Surveyor घर और सामान को हुए नुकसान का निरीक्षण करता है और अपनी रिपोर्ट तैयार करता है। इसके बाद पॉलिसी की शर्तों, जमा किए गए दस्तावेजों, नुकसान के आकलन और Sum Insured के आधार पर क्लेम की राशि तय की जाती है।
यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि खराब या नष्ट हुए घरेलू सामान का पूरा नया मूल्य हर मामले में मिलना जरूरी नहीं है। क्लेम की राशि सामान की उम्र, उसकी स्थिति, पॉलिसी की शर्तों और मूल्यांकन के तरीके पर निर्भर कर सकती है। कई मामलों में डेप्रिसिएशन यानी सामान की उम्र और इस्तेमाल के आधार पर उसकी कीमत में कटौती की जा सकती है, जबकि कुछ विशेष पॉलिसियों या अतिरिक्त क्लॉज में अलग नियम लागू हो सकते हैं।
बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदा में घरेलू सामान के नुकसान का इंश्योरेंस क्लेम मिल सकता है, लेकिन इसके लिए यह जरूरी है कि सामान आपकी पॉलिसी के तहत कवर हो और नुकसान भी किसी covered risk के कारण हुआ हो। इसलिए होम इंश्योरेंस खरीदते समय केवल मकान के ढांचे ही नहीं, बल्कि घर के अंदर मौजूद सामान के कवरेज को भी समझना जरूरी है। सही इंश्योरेंस कवरेज, समय पर दी गई सूचना और नुकसान से जुड़े मजबूत दस्तावेज प्राकृतिक आपदा के बाद क्लेम प्रक्रिया को काफी आसान बना सकते हैं।
