Digital पेमेंट करते हैं तो इन पांच स्कैम से बचकर रहें, सबसे खतरनाक है तीसरा

डिजिटल पेमेंट आज लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुका है। UPI पेमेंट तक लगभग हर फोन से हो रहा है। खाना ऑर्डर करना हो, किसी दोस्त को पैसे भेजने हों या मोबाइल रिचार्ज करना हो, सब कुछ कुछ सेकंड में हो जाता है, लेकिन जितनी तेजी से डिजिटल भुगतान का इस्तेमाल बढ़ा है, उतनी ही तेजी से ऑनलाइन ठगी के मामले भी बढ़े हैं।

Authored by: प्रदीप पाण्डेयUpdated Jun 4 2026, 13:23 IST
चौंकाने वाली बात यह है कि अधिकांश मामलों में हैकर्स सीधे किसी का अकाउंट हैक नहीं करते, बल्कि लोगों को खुद ऐसी गलती करने के लिए प्रेरित करते हैं जिससे उनका पैसा निकल जाता है। इसलिए साइबर ठगी के सामान्य तरीकों को समझना बेहद जरूरी हो गया है। आइए डिजिटल पेमेंट में होने वाले स्कैम के कुछ तरीके के बारे में जानते हैं...Image Credit : Canva01 / 08

चौंकाने वाली बात यह है कि अधिकांश मामलों में हैकर्स सीधे किसी का अकाउंट हैक नहीं करते, बल्कि लोगों को खुद ऐसी गलती करने के लिए प्रेरित करते हैं जिससे उनका पैसा निकल जाता है। इसलिए साइबर ठगी के सामान्य तरीकों को समझना बेहद जरूरी हो गया है। आइए डिजिटल पेमेंट में होने वाले स्कैम के कुछ तरीके के बारे में जानते हैं...

QR कोड स्कैन कर पैसे मिलने का दावा सबसे बड़ा जालImage Credit : Canva02 / 08

QR कोड स्कैन कर पैसे मिलने का दावा सबसे बड़ा जाल

साइबर ठगों का सबसे आम तरीका QR कोड के जरिए लोगों को फंसाना है। अक्सर ठग कहते हैं कि वे पेमेंट कर रहे हैं और पैसे प्राप्त करने के लिए QR कोड स्कैन करने को कहते हैं। असलियत यह है कि QR कोड का इस्तेमाल केवल पैसे भेजने के लिए किया जाता है, पैसे प्राप्त करने के लिए नहीं। यदि कोई QR कोड स्कैन करने के बाद UPI PIN दर्ज करता है, तो उसके खाते से पैसा निकल जाता है। इसलिए पैसे प्राप्त करने के लिए कभी भी QR कोड स्कैन करने की जरूरत नहीं होती।

असली जैसे दिखने वाले फर्जी लिंक से भी रहें सतर्कImage Credit : Canva03 / 08

असली जैसे दिखने वाले फर्जी लिंक से भी रहें सतर्क

कई बार लोगों को संदेश मिलता है कि उनका बैंक खाता सत्यापन के लिए लंबित है, बिजली बिल जमा नहीं हुआ है या KYC अपडेट करना जरूरी है। इन संदेशों के साथ एक लिंक भी दिया जाता है। पहली नजर में वेबसाइट असली लग सकती है, लेकिन URL की स्पेलिंग में छोटी गलती, अजीब डिजाइन या संदिग्ध डोमेन नाम इसकी पहचान हो सकते हैं। जैसे ही कोई व्यक्ति वहां अपनी बैंकिंग या व्यक्तिगत जानकारी दर्ज करता है, वह सीधे ठगों के हाथ में पहुंच जाती है।

बैंक अधिकारी बनकर एप डाउनलोड कराने का नया तरीकाImage Credit : Canva04 / 08

बैंक अधिकारी बनकर एप डाउनलोड कराने का नया तरीका

साइबर अपराधी अब खुद को बैंक कर्मचारी या कस्टमर सपोर्ट एजेंट बताकर भी लोगों को निशाना बना रहे हैं। वे बेहद पेशेवर अंदाज में बात करते हैं और किसी समस्या के समाधान के नाम पर एक एप डाउनलोड करने के लिए कहते हैं।

स्क्रीन शेयरImage Credit : Canva05 / 08

स्क्रीन शेयर

ऐसे एप कई बार स्क्रीन शेयरिंग या रिमोट एक्सेस की सुविधा देते हैं। इसके बाद ठग आपकी स्क्रीन देख सकते हैं और OTP, पासवर्ड या अन्य संवेदनशील जानकारी हासिल कर सकते हैं। पीड़ित को अक्सर तब तक कुछ भी गलत नहीं लगता जब तक पैसा खाते से निकल नहीं जाता।

जल्दबाजी का दबाव बनाकर फंसाते हैं ठगImage Credit : Canva06 / 08

जल्दबाजी का दबाव बनाकर फंसाते हैं ठग

लगभग हर साइबर ठगी में एक बात समान होती है, जल्द कार्रवाई करने का दबाव। ठग अक्सर कहते हैं कि खाता बंद हो जाएगा, KYC समाप्त हो जाएगी या यह ऑफर केवल सीमित समय के लिए उपलब्ध है। यह दबाव लोगों को सोचने और जानकारी की जांच करने का समय नहीं देता, जिससे वे जल्दबाजी में गलत कदम उठा लेते हैं।

कुछ आसान आदतें बढ़ा सकती हैं सुरक्षाImage Credit : Canva07 / 08

कुछ आसान आदतें बढ़ा सकती हैं सुरक्षा

डिजिटल भुगतान को सुरक्षित रखने के लिए जटिल उपायों की जरूरत नहीं होती। फोन में PIN, फिंगरप्रिंट या फेस लॉक का उपयोग करना चाहिए। सार्वजनिक Wi-Fi पर भुगतान करने से बचना चाहिए और अपना फोन किसी अजनबी को नहीं देना चाहिए। इसके अलावा OTP और UPI PIN जैसी जानकारी किसी के साथ साझा नहीं करनी चाहिए। बैंक, UPI एप या कोई भी आधिकारिक संस्था कभी भी OTP या PIN नहीं मांगती।

ट्रांजेक्शन अलर्ट हमेशा रखें चालूImage Credit : Canva08 / 08

ट्रांजेक्शन अलर्ट हमेशा रखें चालू

SMS और एप नोटिफिकेशन अलर्ट सक्रिय रखने से किसी भी संदिग्ध लेनदेन की जानकारी तुरंत मिल जाती है। इससे समय रहते कार्रवाई करना आसान हो जाता है। इसके अलावा दैनिक लेनदेन की सीमा जरूरत के अनुसार ही निर्धारित करनी चाहिए। इससे किसी धोखाधड़ी की स्थिति में संभावित नुकसान को कम किया जा सकता है।

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