हाल ही में दिल्ली के इस योजना को लागू करने के साथ ही अब देश के 35 राज्य और केंद्र शासित प्रदेश इसके दायरे में आ चुके हैं, हालांकि यह योजना लाखों लोगों को आर्थिक सुरक्षा देती है, लेकिन यह जानना भी जरूरी है कि सभी बीमारियां और इलाज इसके अंतर्गत कवर नहीं किए जाते। आइए जानते हैं...
आयुष्मान भारत योजना के तहत ऐसे इलाज शामिल नहीं हैं जिनमें अस्पताल में भर्ती होने की आवश्यकता नहीं होती। सामान्य डॉक्टर परामर्श, नियमित जांच, डायग्नोस्टिक टेस्ट और पुरानी बीमारियों की दवाइयों जैसे खर्च इस योजना के तहत कवर नहीं किए जाते।
यदि किसी मरीज को केवल जांच या निगरानी के लिए अस्पताल में भर्ती किया जाता है और कोई विशेष उपचार नहीं किया जाता, तो उसका खर्च योजना के तहत कवर नहीं होता। इसके अलावा विटामिन, सप्लीमेंट या टॉनिक भी तब तक कवर नहीं होते जब तक वे किसी प्रमाणित उपचार का हिस्सा न हों।
दांतों से जुड़े कई सामान्य उपचार जैसे रूट कैनाल, कैविटी फिलिंग, डेंटल इम्प्लांट या मसूड़ों की बीमारी का इलाज इस योजना में शामिल नहीं है। यदि किसी दुर्घटना, सिस्ट या ट्यूमर के कारण दंत सर्जरी की आवश्यकता हो और मरीज को अस्पताल में भर्ती करना पड़े, तो ऐसे मामलों में खर्च कवर किया जा सकता है।
आईवीएफ (IVF) या अन्य सहायक प्रजनन तकनीकों से जुड़े उपचार भी आमतौर पर आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत शामिल नहीं होते, जब तक कि उन्हें विशेष लाभ पैकेज में शामिल न किया गया हो।
राष्ट्रीय टीकाकरण कार्यक्रम में शामिल नहीं होने वाले वैक्सीन और इम्यूनाइजेशन इस योजना के तहत कवर नहीं किए जाते।
सौंदर्य बढ़ाने के उद्देश्य से की जाने वाली सर्जरी जैसे टैटू हटाना, नाक की सर्जरी (राइनोप्लास्टी), एंटी-एजिंग प्रक्रिया या नेक लिफ्ट जैसी कॉस्मेटिक सर्जरी भी इस योजना के दायरे से बाहर हैं।
दो वर्ष से कम उम्र के बच्चों का खतना सामान्य स्थिति में कवर नहीं किया जाता। हालांकि यदि यह किसी बीमारी या दुर्घटना के कारण चिकित्सकीय रूप से जरूरी हो, तो इसका खर्च कवर किया जा सकता है।
ऐसे मरीज जो लंबे समय तक लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर रहते हैं और जिनमें कोई मानसिक या शारीरिक प्रतिक्रिया नहीं होती, उन्हें इस योजना के तहत कवर नहीं किया जाता।
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के अनुसार आयुष्मान भारत योजना का मुख्य उद्देश्य गंभीर बीमारियों के इलाज में आने वाले भारी खर्च से लोगों को बचाना है। इसलिए योजना में उन्हीं उपचारों को प्राथमिकता दी गई है जिनमें अस्पताल में भर्ती होना जरूरी होता है और जिनका खर्च अधिक होता है। नियमित, कॉस्मेटिक या वैकल्पिक उपचारों को बाहर रखकर योजना के संसाधनों का बेहतर उपयोग किया जाता है।
यदि किसी मरीज का इलाज आयुष्मान भारत योजना में शामिल नहीं है, तो कुछ कदम उठाए जा सकते हैं। सबसे पहले यह जांचें कि जिस अस्पताल में इलाज कराना है वह योजना के अंतर्गत सूचीबद्ध है या नहीं। इसके अलावा डॉक्टर से सलाह लेकर यह पता लगाया जा सकता है कि उपचार किसी अन्य कवर पैकेज के तहत आ सकता है या नहीं। जरूरत पड़ने पर भविष्य के खर्चों के लिए अतिरिक्त स्वास्थ्य बीमा या आपातकालीन फंड की भी योजना बनाई जा सकती है।