इसी वजह से यह सवाल उठने लगे थे कि क्या 10, 20 और 50 रुपये के नोट बाजार से गायब हो गए हैं। इन अटकलों पर अब केंद्र सरकार ने विराम लगा दिया है। संसद में सरकार ने साफ कहा कि देश में छोटे मूल्यवर्ग के नोटों की कोई कमी नहीं है। इस संबंध में वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने विस्तृत जानकारी दी।
राज्यसभा में पूछे गए एक सवाल के जवाब में मंत्री ने बताया कि रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के अनुसार परंपरागत एटीएम मशीनों से आमतौर पर छोटे मूल्य के नोट वितरित नहीं किए जाते, हालांकि अब इस समस्या के समाधान के लिए एक पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया गया है।
इसके तहत “स्मॉल वैल्यू डिस्पेंसर” नाम की विशेष एटीएम मशीनें लगाई जा रही हैं। इन मशीनों से 10, 20 और 50 रुपये के नोट निकाले जा सकेंगे, जिससे लोगों को छुट्टे पैसों की परेशानी कम होगी।
सरकार के अनुसार चालू वित्त वर्ष में 26 फरवरी तक केंद्रीय बैंक ने बड़ी संख्या में छोटे नोट बाजार में उपलब्ध कराए हैं। इस दौरान 10 रुपये के करीब 439.40 करोड़ नोट, 20 रुपये के 193.70 करोड़ नोट और 50 रुपये के लगभग 130.30 करोड़ नोट जारी किए गए। वहीं पिछले वित्त वर्ष में 10 रुपये के 180 करोड़, 20 रुपये के 150 करोड़ और 50 रुपये के 300 करोड़ नोटों की आपूर्ति की गई थी।
मंत्री ने बताया कि आरबीआई लगातार अर्थव्यवस्था की जरूरतों के अनुसार विभिन्न मूल्यवर्ग के नोटों की मांग का आकलन करता है और उसी आधार पर सरकार को नोट छापने की सिफारिश करता है। छोटे मूल्य की नकदी की मांग केवल नोटों से ही नहीं बल्कि सिक्कों के माध्यम से भी पूरी की जाती है। इसके अलावा कम राशि के लेनदेन में डिजिटल भुगतान का उपयोग भी तेजी से बढ़ रहा है।
एक अन्य प्रश्न के जवाब में मंत्री ने बताया कि National Payments Corporation of India के आंकड़ों के अनुसार वित्त वर्ष 2025-26 में 31 दिसंबर 2025 तक RuPay KCC कार्ड के जरिए लगभग 3.72 लाख डिजिटल लेनदेन दर्ज किए गए। इन लेनदेन का कुल मूल्य करीब 111.17 करोड़ रुपये रहा।