अधिकारियों के मुताबिक, FASTag सिस्टम को और आसान बनाने के लिए KYC प्रक्रिया में बदलाव किया गया है। पहले वाहन चालकों को FASTag एक्टिव रखने के लिए बार-बार KYC अपडेट करानी पड़ती थी, जिससे कई बार टैग ब्लॉक होने की समस्या आती थी। नए नियम के बाद यह झंझट खत्म हो जाएगी।
हालांकि KYC की बाध्यता हटाई गई है, लेकिन सुरक्षा को लेकर सरकार ने वैकल्पिक उपाय अपनाए हैं। FASTag को सीधे वाहन रजिस्ट्रेशन डेटा और सिस्टम रिकॉर्ड से जोड़ा गया है, जिससे गलत इस्तेमाल, डुप्लीकेट टैग और फर्जी लेन-देन पर नजर रखी जा सकेगी।
नए बदलाव के बाद FASTag यूजर्स को टोल प्लाजा पर रुकने या टैग ब्लॉक होने की चिंता नहीं रहेगी। बिना KYC अपडेट की परेशानी के वाहन चालक अब सुचारु रूप से टोल प्लाजा पार कर सकेंगे, जिससे ट्रैफिक जाम और समय की बर्बादी भी कम होगी।
भले ही अब KYC अनिवार्य न हो, लेकिन FASTag अकाउंट में पर्याप्त बैलेंस होना जरूरी रहेगा। साथ ही वाहन की जानकारी सही और अपडेट होनी चाहिए, ताकि टोल कटौती में कोई दिक्कत न आए।
इस फैसले से डिजिटल टोल कलेक्शन सिस्टम को और मजबूती मिलने की उम्मीद है। FASTag यूजर्स की संख्या बढ़ेगी और हाईवे पर सफर पहले से ज्यादा तेज और सुविधाजनक होगा।
कुल मिलाकर कहें तो FASTag से KYC की अनिवार्यता हटने का फैसला वाहन चालकों के लिए बड़ी राहत साबित हो सकता है। इससे न सिर्फ प्रक्रिया आसान होगी, बल्कि टोल प्लाजा पर होने वाली तकनीकी दिक्कतों और रुकावटों से भी छुटकारा मिलेगा।
इस दावे की सच्चाई यह है कि NHAI या सरकार की ओर से FASTag को लेकर ऐसा कोई नियम जारी नहीं किया गया है। यह पूरी तरह से फर्जी और भ्रामक जानकारी है। न तो 7-सीटर और न ही 5-सीटर निजी वाहनों के FASTag नियमों में किसी तरह का बदलाव किया गया है। NHAI पहले भी कई बार स्पष्ट कर चुका है कि सोशल मीडिया पर फैल रही ऐसी अफवाहों से सावधान रहने की जरूरत है।
FASTag को लेकर वायरल हो रही यह इमेज पूरी तरह से फेक न्यूज है। आम लोगों को सलाह है कि वे सोशल मीडिया पर फैल रही ऐसी पोस्ट को न तो शेयर करें और न ही उस पर भरोसा करें। किसी भी सरकारी योजना या नियम की सही जानकारी के लिए केवल आधिकारिक स्रोतों पर ही भरोसा करें, ताकि भ्रम और नुकसान से बचा जा सके।