अगर आप सोच रहे हैं कि लखनऊ जाकर क्या-क्या एक्सप्लोर करें, तो ये आर्टिकल आपके बेहद काम आने वाला है। लखनऊ में एक से बढ़कर एक तमाम जगहे हैं जहां पुरानी गलियों वाली वाइब आपको मिल जाएगी। यहां की गलियों में कई ऐसी कहानियां छिपी हैं जो आपको टाइम ट्रैवल करा देंगी।
लखनऊ की असली जान उसके पुराने इलाके हैं। यहां की हेरिटेज वॉक कोई नॉर्मल घूमना-फिरना नहीं है, बल्कि ऐसा एक्सपीरियंस है जहां हर गली कोई नई कहानी सुनाती है। चाहे आप अकेले ट्रिप पर आए हों या दोस्तों के साथ, चौक और पुराने लखनऊ की गलियों में घूमना आपको पुराने जमाने में ले जाएगा। यहां के पुराने दरवाजे, हवेलियां और पतली गलियां देखकर लगेगा जैसे इतिहास अभी भी जिंदा है।
अगर इतिहास और पुराने इलाज के तरीकों में दिलचस्पी है, तो ये जगह जरूर देखनी चाहिए। यहां आज भी पुराने तरीके से इलाज होता है। चौक के गोल दरवाजे इलाके में मौजूद ये पुराना यूनानी दवाखाना आज भी लोगों के लिए किसी विरासत से कम नहीं है। यहां जड़ी-बूटियों और पारंपरिक दवाओं से इलाज किया जाता है।
अब बात करते हैं लखनऊ के सबसे यूनिक कॉन्सेप्ट टोला की। टोला मतलब ऐसी छोटी-छोटी बस्तियां जिनका सिर्फ एक एंट्री और एक एग्जिट पॉइंट होता है। मजेदार बात ये है कि एक टोले का रास्ता दूसरे टोले में जाकर खुल जाता है। पहली बार जाओगे तो पक्का रास्ता भूल जाओगे। कई लोग तो इसे असली देसी भूलभुलैया भी कहते हैं। लेकिन अफसोस, इसके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं।
फिरंगी महल लखनऊ की उन जगहों में से है जिसके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं। औरंगजेब के समय में यहां यूरोपियन व्यापारी रहा करते थे। बाद में ये जगह इस्लामिक शिक्षा का बड़ा केंद्र भी बनी। आज ये जगह इतिहास प्रेमियों और पुराने लखनऊ को करीब से समझने वालों के लिए काफी खास मानी जाती है।
आज के समय में कोठा शब्द सुनते ही लोगों के दिमाग में अलग इमेज बन जाती है, लेकिन नवाबों के दौर में ऐसा नहीं था। उस समय कोठे तहजीब, अदब और संगीत सीखने की जगह हुआ करते थे। यहां नवाब और अमीर लोग बातचीत का तरीका, शायरी, संगीत और लोगों से पेश आने का सलीका सीखने आते थे। लेकिन वक्त बदला और नवाबों के जाने के बाद इन जगहों की पहचान भी बदल गई।
लखनऊ की ट्रिप बिना खाने के अधूरी है। चौक इलाके की गलियों में निकल जाओ, हर दूसरी दुकान से ऐसी खुशबू आएगी कि खुद-ब-खुद पैर रुक जाएंगे। यहां के कबाब, बिरयानी, कुल्फी और मिठाइयों का टेस्ट अलग ही लेवल का है। टुंडे कबाबी गए बिना वापस मत आना। यहां के गलौटी कबाब इतने सॉफ्ट होते हैं कि मुंह में जाते ही घुल जाते हैं।