कटरा से माता वैष्णो देवी की यात्रा शुरू होती है। दर्शन के बाद अगर एक दिन और हों, तो पटनीटॉप जा सकते हैं। पहाड़ों के बीच आराम से समय बिताने के लिए यह अच्छा पड़ाव है। हां लेकिन नवरात्र में यात्रा करने से पहले दर्शन और ठहरने की व्यवस्था जांच लें।
हिमाचल प्रदेश में पहाड़ी पर बने नैना देवी मंदिर के दर्शन के बाद गोबिंद सागर झील का रुख करें। समय हो तो भाखड़ा बांध और आनंदपुर साहिब को भी यात्रा में जोड़ सकते हैं। इस तरह एक ही ट्रिप में पहाड़, झील और कई धार्मिक स्थल देखने को मिलेंगे।
हरिद्वार में मनसा देवी मंदिर से शहर और गंगा का नजारा दिखता है। दर्शन के बाद घाटों की ओर निकलें और शाम को हर की पौड़ी की गंगा आरती देखें। कम दिनों की छुट्टी में भी यह यात्रा आसानी से यादगार बन सकती है।
गुवाहाटी के नीलाचल पहाड़ पर कामाख्या देवी मंदिर है। यहां दर्शन के बाद ब्रह्मपुत्र नदी और उसके बीच बसे उमानंद द्वीप को देखने जा सकते हैं। मंदिर की यात्रा के साथ नदी का दृश्य इस ट्रिप को एक अलग अनुभव देता है।
मैसूर की चामुंडी पहाड़ी पर माता चामुंडेश्वरी का मंदिर है। दर्शन के बाद मैसूर पैलेस देखिए और समय बचने पर बृंदावन गार्डन घूम आइए। नवरात्र के आसपास मैसूर की यात्रा में शहर की संस्कृति और दशहरे का माहौल भी आकर्षण बनता है।
कोलकाता में माता काली के दर्शन के लिए कालीघाट जाएं। फिर शहर के मशहूर विक्टोरिया मेमोरियल और प्रिंसेप घाट को अपनी योजना में शामिल करें। एक दिन मंदिर और शहर की सैर के लिए रखें, ताकि यात्रा में जल्दबाजी न हो।
हिमाचल के कांगड़ा क्षेत्र में चामुंडा देवी के दर्शन के बाद कांगड़ा किला घूम सकते हैं। किले के पुराने रास्ते और आसपास के पहाड़ी दृश्य यात्रा में इतिहास का रंग जोड़ देते हैं। अगर आपके पास दो दिन हैं, तो इस पड़ाव को आराम से देखने का समय रखें।