अनुनय झा की गिनती यूपी कैडर के सबसे पढ़े-लिखे और तकनीकी रूप से दक्ष युवा अधिकारियों में होती है। उन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा दिल्ली के चाणक्यपुरी स्थित संस्कृति स्कूल से प्राप्त की। उसके बाद उन्होंने देश के प्रतिष्ठित संस्थान आईआईटी रुड़की (IIT Roorkee) से इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्यूनिकेशन इंजीनियरिंग में बी.टेक की डिग्री हासिल की। बीटेक की डिग्री के बाद उन्होंने जेएनयू से पब्लिक मैनेजमेंट में मास्टर की डिग्री भी प्राप्त की है। छात्र जीवन से ही अनुनय पढ़ाई में अव्वल रहे और जटिल समस्याओं को तकनीकी दृष्टिकोण से हल करने में विश्वास रखते हैं।
आईआईटी से पढ़ाई पूरी करने के बाद अनुनय झा ने बहुराष्ट्रीय स्तर पर अपने कौशल का प्रदर्शन किया। सिविल सेवा में आने से पहले उन्होंने विश्व बैंक के एक नीति निर्माण आदि के प्रोजेक्ट में कार्य किया। उस दौरान ही उन्हें ऐसा लगा कि सरकार के प्रोजेक्ट्स को जमीन पर उतारने के लिए एक प्रशासनिक अधिकारी की अहम भूमिका होती है। बस फिर क्या उन्होंने सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी शुरू की।
देश और परिवार में सिविल सेवा के माहौल ने देश की सेवा के जज्बे ने अनुनय झा को सिविल सेवा की ओर मोड़ा। जहां उम्मीदवार केवल एक बार परीक्षा पास करने का सपना देखते हैं, वो भी मुश्किल होता है, वहीं अनुयय ने एक बार नहीं बल्कि दो पास सिविल सेवा परीक्षा (UPSC CSE) में शानदार सफलता हासिल की। उन्होंने 2013 में पहले ही प्रयास में 145वीं रैंक हासिल की और आईआरएस (IRS) के पद पर चुने गए। लेकिन आईएएस अधिकारी बनने के सपने को उन्हें पीछे न छोड़ते हुए तैयारी जारी रखी। उसके बाद 2025 में आयोजित हुई सीएसई परीक्षा में उन्होंने ऑल इंडिया 57वीं रैंक (AIR 57) प्राप्त की। वर्ष 2015 बैच के आईएएस अधिकारी के रूप में उनका चयन उत्तर प्रदेश कैडर के लिए हुआ।
आईएएस में शामिल होने के बाद अनुनय झा ने उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों में अपनी सेवाएं दी। वे अलीगढ़ में मुख्य विकास अधिकारी (CDO) और मथुरा-वृंदावन नगर निगम के नगर आयुक्त जैसे महत्वपूर्ण पदों पर तैनात रहे। मथुरा में नगर आयुक्त रहते हुए उन्होंने स्वच्छता, अतिक्रमण हटाओ अभियान और तीर्थ नगरी के बुनियादी ढांचे के विकास में कई बड़े बदलाव किए।
मुरादाबाद आने से पहले अनुनय झा महराजगंज जिले के जिलाधिकारी (DM) के रूप में तैनात थे। महराजगंज में अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने नेपाल सीमा से सटे इस जिले में कानून-व्यवस्था को मजबूत किया। महाराजगंज के अलावा उन्होंने हरदोई के जिलाधिकारी के तौर पर भी काम किया है।
अनुनय ने कई इंटरव्यू में बताया है कि उन्हें आईएएस अधिकारी बनने की प्रेरणा उनके नाना से मिली, जो 1994-1997 तक बिहार के डीजीपी रहे थे। उनके नाना बलवर झा 1962 बैच के आईपीएस अधिकारी थे। न केवल नाना, बल्कि उनके पिता नित्यानंद मिश्रा एक आईआरएफ अधिकारी रहे हैं और उनकी मां भारतीय डाक विभाग में बोर्ड की सदस्य हैं। घर में सिविल सेवा का माहौल शुरू से ही था, जिससे उन्हें काफी लाभ हुआ है।
पीतल नगरी के रूप में प्रसिद्ध मुरादाबाद जिले का प्रभार संभालने के लिए आईएएस अधिकारी अनुनय झा को चुना गया है। आईआईटी रुड़की से निकलकर वर्ल्ड बैंक और फिर उत्तर प्रदेश के प्रशासनिक तंत्र में अपनी अलग छाप छोड़ने वाले अनुनय झा से मुरादाबाद की जनता को विकास और सुशासन की बड़ी उम्मीदें हैं।