भारत और म्यांमार के बीच अंतर्राष्ट्रीय सीमा पर स्थित लोंगवा गांव बेहद अनूठा है। यह गांव कोन्याक नागा जनजाति का घर है, जो अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और शिकारियों के इतिहास के लिए फेमस है।
लोंगवा गांव के निवासी भारत और म्यांमार दोनों देशों के नागरिक होते हैं क्योंकि यह गांव अंतर्राष्ट्रीय सीमा पर स्थित है जो इसकी विशेषता भी है। प्राकृतिक सुंदरता से लेकर सांस्कृतिक विविधता तक सब मिलकर इसे अद्वितीय पर्यटन स्थल बनाती है।
गांव को फ्री मूवमेंट रेजीम (FMR) से लाभ मिलता है जिसके चलते गांववाले बिना वीजा के सीमा पार 16 km तक यात्रा कर सकते हैं और 14 दिनों तक रुक सकते हैं। ऐसा करने के लिए उन्हें वीजा या फिर पासपोर्ट की जरूरत नहीं है।
यहां गांव के मुखिया, जिन्हें अंग कहा जाता है उनका घर भारत और म्यांमार दोनों देशों की सीमा पर स्थित है। इसका मतलब है कि अंग का आधा घर भारत में और आधा म्यांमार में है।
सुरम्य पहाड़ियों, हरे-भरे जंगलों और शांतिपूर्ण वातावरण के लिए ये गांव पर्यटकों को आकर्षित करता है। ये गांव 4 नदियों के संगम पर स्थित है, जिनमें से 2 भारत और 2 म्यांमार में बहती हैं।
इस गांव तक पहुंचने के लिए सबसे नजदीकी एयरपोर्ट जोरहाट असम (मोन से लगभग 161 किलोमीटर दूर) है। एयरपोर्ट पहुंचकर बस या निजी वाहन के माध्यम से मोन पहुंचा जा सकता है।