घूमने-फिरने के दौरान पर्यटक हमेशा से ही किसी यूनीक जगह की तलाश में रहते हैं। नवाबों के इतिहास में अगर आपको रूचि है तो इस बार आप एक अनोखी जगह की यात्रा कर सकते हैं जहां एक वक्त पर सैफ अली खान के दादा रहा करते थे।
हम बात कर रहे हैं अकबर मंजिल की जिसे इब्राहिम कोठी भी कहा जाता है। पटौदी के नवाबों का इतिहास करीब से जानने के लिए आप अकबर मंजिल का रुख कर सकते हैं। अकबर मंजिल नवाबों के शाही जीवन की शुरुआत का प्रतीक है।
अकबर मंजिल एक भूली-बिसरी हवेली है जिसका इतिहास बेहद ही प्राचीन है। नवाब मुहम्मद अकबर अली के शासनकाल में 1857 के बाद अकबर मंजिल बनाई गई थी जो 1941 तक पटौदी परिवार का मुख्य निवास स्थान रहा।
द्वितीय विश्व युद्ध से पहले, भोपाल के नवाब ने पटौदी परिवार के विवाह प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया था। भोपाल के नवाब ने अकबर मंजिल को अपनी बेटी के लिए बहुत छोटा समझा, जिसके कारण सैफ अली खान के दादा इफ्तिखार अली खान ने एक भव्य महल बनाने का फैसला लिया। इस प्रकार पटौदी पैलेस का निर्माण हुआ।
भव्यता और ऐतिहासिक महत्व होने के बावजूद अकबर मंजिल वर्तमान में अपनी गरिमा पूरी तरह से खो चुकी है और इसका उपयोग अब एक गोदाम (स्टोर) के रूप में होता है।
गुरुग्राम से सिर्फ 30 किलोमीटर दक्षिण में ये कोठी मौजूद है। गेहूं के खेतों से घिरे एक छोटे से हरियाणवी गांव में स्थित इब्राहिम कोठी की भव्यता देखते ही बनती है।