मोबाइल और इंटरनेट के दौर में संवाद को लेकर पूछे गए सवाल पर डोभाल ने कहा कि वे सामान्य तौर पर इंटरनेट और फोन का उपयोग नहीं करते, हालांकि विदेश में किसी से संपर्क करना हो तो कभी-कभार इनका सहारा लेते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनके पास संवाद के वैकल्पिक और सुरक्षित माध्यम भी हैं, जिनकी जानकारी सार्वजनिक नहीं है।
इस कार्यक्रम में देशभर से करीब 3,000 युवा प्रतिनिधि शामिल हुए। मुख्य अतिथि के रूप में डोभाल ने युवाओं को संबोधित करते हुए भारत के भविष्य, सुरक्षा और नेतृत्व पर अपने अनुभव साझा किए।
डोभाल ने कहा कि भारत को सिर्फ सीमाओं पर ही नहीं, बल्कि अर्थव्यवस्था, सामाजिक विकास और अन्य सभी क्षेत्रों में खुद को मजबूत करना होगा। उन्होंने इतिहास का हवाला देते हुए कहा कि देश ने उपनिवेशवाद और हमलों का दर्द झेला है, और अब उस इतिहास से सबक लेकर आगे बढ़ने का समय है।
अपने संबोधन में डोभाल ने कहा कि आज की पीढ़ी सौभाग्यशाली है कि वह स्वतंत्र भारत में जन्मी है। उन्होंने भगत सिंह, सुभाष चंद्र बोस और महात्मा गांधी जैसे स्वतंत्रता सेनानियों के संघर्ष और बलिदान को याद करते हुए कहा कि इन्हीं के कारण देश को आज़ादी मिली।
डोभाल ने कहा कि भले ही प्रतिशोध एक नकारात्मक शब्द लगे, लेकिन यह एक शक्तिशाली प्रेरक शक्ति बन सकता है। उनके अनुसार, इतिहास से मिली पीड़ा को ताकत में बदलकर भारत को हर क्षेत्र में महान बनाना जरूरी है।
युवाओं को भविष्य का नेता बताते हुए डोभाल ने मजबूत नेतृत्व पर जोर दिया और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का उदाहरण दिया। उन्होंने नेपोलियन के कथन को उद्धृत करते हुए कहा कि नेतृत्व की गुणवत्ता ही किसी राष्ट्र की दिशा तय करती है।
अपने भाषण के अंत में डोभाल ने युवाओं को निर्णायक, अनुशासित और नवाचारी बनने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि सपने केवल दिशा दिखाते हैं, जीवन अनुशासन से बनता है। साथ ही उन्होंने विज्ञान और तकनीक में नवाचार पर जोर देते हुए कहा कि असली संदेश प्रचार से नहीं, बल्कि प्रदर्शन से जाता है।