टेक्नोलॉजी एक्सपर्ट्स के अनुसार, अगर अच्छी क्वालिटी और सर्टिफाइड पावरबैंक का इस्तेमाल किया जाए, तो फोन को किसी तरह का नुकसान नहीं होता। आजकल के ज्यादातर स्मार्टफोन और पावरबैंक में ओवरचार्ज, ओवरहीटिंग और शॉर्ट सर्किट से बचाव के लिए सेफ्टी फीचर्स दिए जाते हैं। इसलिए सामान्य परिस्थितियों में पावरबैंक से चार्ज करने पर फोन खराब होने का खतरा नहीं होता।
समस्या तब पैदा होती है जब लोग लोकल या बिना ब्रांड वाले सस्ते पावरबैंक का इस्तेमाल करते हैं। ऐसे पावरबैंक में सही वोल्टेज और करंट कंट्रोल नहीं होता, जिससे फोन की बैटरी पर दबाव पड़ सकता है। कई बार जरूरत से ज्यादा गर्मी पैदा होती है, जो लंबे समय में बैटरी की क्षमता को कम कर सकती है या चार्जिंग पोर्ट को नुकसान पहुंचा सकती है।
कई यूजर्स को यह भी लगता है कि पावरबैंक से फास्ट चार्जिंग करने पर फोन जल्दी खराब होता है। सच्चाई यह है कि अगर पावरबैंक और केबल दोनों फास्ट चार्जिंग को सपोर्ट करते हैं, तो इसमें कोई दिक्कत नहीं होती। लेकिन अगर फोन फास्ट चार्जिंग ले रहा हो और पावरबैंक उस स्टैंडर्ड के अनुकूल न हो, तो चार्जिंग धीमी हो सकती है या हल्की गर्मी महसूस हो सकती है।
पावरबैंक से बार-बार चार्ज करने से बैटरी पर वही असर पड़ता है, जो किसी भी चार्जर से चार्ज करने पर होता है। असली नुकसान तब होता है जब फोन को 0 प्रतिशत तक डिस्चार्ज कर दिया जाए या लगातार ओवरचार्ज किया जाए। बैटरी की सेहत बनाए रखने के लिए 20 से 80 प्रतिशत के बीच चार्ज रखना बेहतर माना जाता है।
फोन को सुरक्षित रखने के लिए हमेशा ISI या BIS सर्टिफाइड पावरबैंक चुनें। साथ ही ओरिजिनल या अच्छी क्वालिटी की चार्जिंग केबल का इस्तेमाल करें। चार्जिंग के दौरान फोन को बहुत ज्यादा गर्म जगह पर न रखें और अगर पावरबैंक जरूरत से ज्यादा गर्म हो रहा हो, तो उसका इस्तेमाल तुरंत बंद कर दें।
कुल मिलाकर यह कहना गलत है कि पावरबैंक से चार्ज करने पर फोन खराब हो जाता है। सही पावरबैंक और सही तरीके से इस्तेमाल करने पर यह एक सुरक्षित और भरोसेमंद विकल्प है। असली खतरा गलत और सस्ते पावरबैंक से है, न कि पावरबैंक की तकनीक से।