बीसीसीआई और ड्रीम-11 के बीच भारतीय टीम की जर्सी के स्पॉन्सर के रूप में जुलाई 2023 से मार्च 2026 तक की समयावधि के लिए डील हुई थी। ऑनलाइन गेमिंग कानून के लागू होने के बाद तय वक्त से 9 महीने पहले ड्रीम 11 ने अपने हाथ स्पॉन्सरशिप से खींच लिए हैं। यह बीसीसीआई के लिए करारा झटका है। एशिया कप 2025 का आयोजन 9 सितंबर से होने जा रहा है। ऐसे में नया स्पॉन्सर ढूंढना बीसीसीआई के लिए मुश्किल काम हो गया है।(फोटो क्रेडिट AP)
भारतीय क्रिकेट टीम की जो भी बड़ी कंपनियां स्पॉन्सर बनीं उनका हाल बेहाल हो गया। पिछले 25 सालों में भारतीय टीम के साथ बतौर स्पॉन्सर सहारा,स्टार, वीवो, बैजूस और ड्रीम-11 जैसी कंपनियां जुड़ चुकी हैं। जो भी कंपनियां भारतीय टीम से जुड़ीं उनका हाल उसके बाद बेहाल हो गया। सहारा इंडिया तकरीबन डूब चुकी है। स्टार भी बड़ा ब्रांड नहीं रहा। वीवो की मोबाइल फोन के बाजार में पकड़ बेहद कमजोर हो गई। ऑनलाइन एजुकेशन देने वाली कंपनी बायजू भारी कर्ज में है और अब ड्रीम इलेवन को अपना कारोबार नए कानून की वजह से बंद करना पड़ा। ऐसे में कई बड़ी कंपनियां बीसीसीआई के साथ टीम इंडिया के साथ स्पॉन्सरशिप डील नहीं करना चाहती हैं।
टाटा ग्रुप बीसीसीआई की नया स्पॉन्सर बन सकता है। टाटा समूह भारतीय बाजार में बहुत मजबूत और विश्वसनीय नाम है। हालांकि टाटा पहले से ही आईपीएल का साल 2028 तक टाइटल स्पॉन्सर है। टाटा हमेशा से बड़े खेल आयोजनों का प्रायोजक रहा है। ऐसे में बीसीसीआई मजबूत और दीर्घकालिक स्पॉन्सर की तलाश कर रहा है और टाटा जैसी कंपनी के साथ वो डील करता है। जिससे मौजूदा स्थिति से बचा जा सके और लंबे समय तक एक दूसरे का साथ रहे।
रिलायंस इंडस्ट्रीज भारत में कई क्षेत्रों में काम कर रही है। खेल के क्षेत्र में रिलायंस का निवेश है। रिलायंस जियो डिजिटल और टेलीकॉम मार्केट में बेहद सक्रिय है। रिलांयस ऐसे में भारतीय टीम का स्पॉन्सर बनने में रुचि दिखा सकता है।
शेयर मार्केट में भारत में लगातार निवेश बढ़ रहा है। इसमें जरोधा (Zerodha), एंजल वन (Angel One), ग्रो (Groww) जैसी फिनटेक कंपनियों का अहम योगदान है। इन कंपनियों ने अपने प्लेटफॉर्म के जरिए शेयर बाजार में आसानी से सीधे तौर पर निवेश करने का विकल्प दिया। ऐसे में ये कंपनियां अपनी पहुंच को व्यापक बनाने के लिए टीम इंडिया का दामन थाम सकती हैं। इनमें से कुछ कंपनियां आईपीएल में स्पॉन्सर के तौर पर जुड़ी रही है। ऐसे में इन कंपनियों को भारतीय टीम के साथ जुड़ने से फायदा पहुंचने की संभावना है और वो इस मौके को खाली नहीं जाने देना चाहेंगी।
अडानी समूह ने पिछले कुछ सालों में खेल के क्षेत्र में अपना निवेश बढ़ाया है। क्रिकेट के अलावा फुटबॉल और बास्केटबॉल जैसे खेल में उन्हें निवेश किया है। अडानी समूह पेरिस ओलंपिक का मुख्य प्रायोजक था। अडानी समूह के आईपीएल टीम खरीदने की अटकलें कई साल से लग रही हैं। ऐसे में अपनी वैश्विक छवि को बेहतर करने के लिए अदानी समूह भारतीय टीम का स्पॉन्सर बनने में रुचि दिखा सकता है।
ऑनलाइन शॉपिंग प्लेटफॉर्म अमेजन और फ्लिपकार्ट जैसी कंपनियां भारत में अपनी पकड़ को और मजबूत करने के लिए भारतीय टीम के साथ बतौर स्पॉन्सर जुड़ सकती हैं। दोनों प्लेटफॉर्म भारत में बेहद लोकप्रिय हैं। भारतीय क्रिकेट प्रेमियों के साथ जुड़ने का यह स्पॉन्सरशिप डील बड़ा मौका हो सकती है। क्रिकेट भारत का सबसे लोकप्रिय खेल है।
भारत की बड़ी ऑटोमोबाइल कंपनी महिंद्रा ग्रुप टीम इंडिया का स्पॉन्सर बनने में रुचि दिखा सकती है। कंपनी के मालिक आंनद महिंद्रा सोशल मीडिया पर बेहद सक्रिय रहते हैं। वो खेल की गतिविधियों में भी बड़ी रुचि रखते हैं। देश को गौरान्वित करने वाले भारतीय खिलाड़ियों को वो लगातार सम्मानित करते रहते हैं। ऐसे में महिंद्रा कंपनी बीसीसीआई के साथ जुड़कर अपनी पकड़ को भारतीय बाजार में और मजबूत करना चाहेगी। टोयोटा जैसी बड़ी ऑटोमोबाइल कंपनी इंग्लैंड क्रिकेट टीम के साथ जुड़ी हुई है। ऐसे में भारतीय टीम के साथ भी वो करार करके अपनी पहुंच को और व्यापक कर सकती है।