अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में द्रविड़ सचिन तेंदुलकर, मोहम्मद अजहरुद्दीन, सौरव गांगुली, अनिल कुंबले और एमएस धोनी की कप्तानी में खेले लेकिन इनमें से कोई भी बतौर कप्तान उनका फेवरट नहीं है। साल 1996 में सचिन तेंदुलकर की कप्तानी में द्रविड़ ने सिंगापुर में वनडे और इसके बाद लॉर्ड्स में इंग्लैंड के खिलाफ टेस्ट डेब्यू किया था।
द्रविड़ के क्रिकेट करियर के सबसे पसंदीदा कप्तान तमिलनाडु के वीबी चंद्रशेखर रहे। तमिलनाडु में उनकी कप्तानी में लीग क्रिकेट खेलते हुए मैंने प्रतिस्पर्धात्मकता और जीतने की ललक देखी और उससे सीखा। मुझे उनके नेतृत्व में क्रिकेट खेलना बहुत अच्छा लगा। करियर के शुरुआती दिनों में वे उन कप्तानों में से एक रहे जिनके अंडर खेलने में मुझे सबसे ज्यादा आनंद आया।(फोटो क्रेडिट TNCA X)
द्रविड़ ने आगे कहा, एमएस धोनी भी बहुत अच्छे थे। खासकर अपने करियर के अंतिम दौर में मैंने देखा कि युवा खिलाड़ी से कप्तान बनने तक का उनका बदलाव आसान नहीं था। सौरव गांगुली ने भारतीय क्रिकेट को जीतने की स्पष्ट सोच दी वहीं अनिल कुंबले संवाद में बेहद साफ-सुथरे थे।'(फोटो क्रेडिट Rahul Dravid Instagram)
वीबी चंद्रशेखर तमिलनाडु के लिए एक अनुभवी क्रिकेट खिलाड़ी थे। उन्होंने कई वर्षों तक तमिलनाडु की टीम की कमान संभाली। उन्होंने 81 प्रथम श्रेणी मैच खेले जिसमें 43.09 के औसत से 4999 रन बनाए जिसमें 10 शतक शामिल थे। इस दौरान उन्होंने 41 लिस्ट ए मैच खेले जिसमें 26.31 के औसत से 1053 रन बनाए।(फोटो क्रेडिट VB Chandrashekhara X)
वीबी चंद्रशेखर ने भारत के लिए 1988 से 1990 तक सात वनडे मैच खेले। इस दौरान उन्होंने 12.57 के औसत से कुल 88 रन बनाए। 53 उनका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन रहा ये पारी उन्होंने इंदौर में न्यूजीलैंड के खिलाफ खेली थी। ये उनके अंतरराष्ट्रीय करियर का एकमात्र अर्धशतक रहा। चंद्रशेखर ने टीम इंडिया की कमान कभी नहीं संभाली। (फोटो क्रेडिट CSK X)
राहुल द्रविड़ खुद भी टीम इंडिया के कप्तान रहे। 2003 से 2007 के बीच उनकी कप्तानी में भारतीय टीम का वेस्टइंडीज की मेजबानी में आयोजित वनडे विश्व कप में हाल बेहाल हो गया था। टीम इंडिया पहले ही दौर में टूर्नामेंट से बाहर हो गई थी।
द्रविड़ की कप्तानी में भारतीय टीम ने 25 टेस्ट खेले जिसमें से 8 में उसे जीत और 6 में हार मिली। वहीं 79वनडे मैच में से 42 में भारतीय टीम विजयी रही और 33 में उसे हार का सामना करना पड़ा।