CJP Protest: दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ हो रहे सीजेपी प्रोटेस्ट के चलते दिल्ली पुलिस, केंद्र सरकार, दिल्ली मेट्रो और रेलवे अधिकारियों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में एक अवमानना याचिका दायर की गई है। इन सभी पर उस आदेश की 'जानबूझकर अनदेखी' करने का आरोप है, जिसमें मेट्रो ट्रेनों और नई दिल्ली तथा निजामुद्दीन रेलवे स्टेशनों पर ट्रेनों के आने पर "पूरी तरह रोक" लगाने से मना किया गया था। यह याचिका CJP विरोध प्रदर्शन मामले के मुख्य याचिकाकर्ताओं वकील शैलेंद्र मणि त्रिपाठी और चांद कुरैशी ने दायर की है।
केंद्र सरकार के खिलाफ याचिका
इस अवमानना याचिका में कहा गया है कि प्रतिवादियों को मेट्रो और रेलवे संचालन पर लगी सभी तरह की रोक को तुरंत हटाने और तुरंत सार्वजनिक सूचना के साथ सख्ती से नियंत्रित संचालन कार्यक्रम लागू करने का तत्काल अंतरिम निर्देश जारी किया जाए। याचिका के अनुसार, 'इस संबंध में स्पष्ट आदेश होने के बावजूद, अवमानना करने वालों को याचिकाकर्ता और दिल्ली के लोगों के मौलिक अधिकारों का खुलेआम उल्लंघन करने से रोका जाए। अवमानना करने वालों ने आधिकारिक आदेश और सार्वजनिक सूचनाएं जारी की थीं कि लोगों के विभिन्न समूहों और CJP द्वारा विरोध प्रदर्शन के आह्वान को देखते हुए, दिल्ली मेट्रो के 45 रेलवे स्टेशन जनता के इस्तेमाल के लिए बंद रहेंगे।'
याचिका में क्या कहा आगे
याचिका में आगे कहा गया, 'माननीय मुख्य न्यायाधीश की बेंच के सामने दिए गए भरोसे और गंभीर न्यायिक आदेश के बावजूद, जिन लोगों ने आदेश का उल्लंघन किया है, उन्होंने जानबूझकर ट्रांज़िट कॉरिडोर पर पूरी तरह से शटडाउन बनाए रखा। इसके अलावा बिना वजह ट्रेनें रद्द करना जारी रखा, और साफ-सुथरी ट्रैफिक और ट्रांजिट एडवाइजरी जारी करने या उनका प्रचार करने में नाकाम रहे। इस जानबूझकर की गई मनमानी ने नेशनल कैपिटल टेरिटरी में जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित किया है। वहीं जरूरी यात्रा करने वाले लोगों को फंसा दिया है और यह इस माननीय न्यायालय के अधिकार और गरिमा को दरकिनार करने और कमजोर करने की जानबूझकर की गई कोशिश है।'
सुप्रीम कोर्ट ने क्या दिया था आदेश
दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने नई दिल्ली और निजामुद्दीन रेलवे स्टेशनों पर मेट्रो ट्रेनों और ट्रेनों के आने-जाने पर पूरी तरह रोक लगाने को अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर किया गया काम कहा था। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि सरकार को नियंत्रित तरीके से रेल और मेट्रो सेवाओं की अनुमति देनी चाहिए।
याचिका में तीन तरह की मांगें
1- WPC डायरी नंबर 63560/2026 में 9 अक्टूबर को पारित आदेश की जानबूझकर और हठपूर्वक अवहेलना करने के लिए अवमानना करने वालों के खिलाफ 'कंटेम्प्ट ऑफ कोर्ट्स एक्ट, 1971' की धारा 12 और भारत के संविधान के अनुच्छेद 129 के तहत अवमानना की कार्यवाही शुरू की जाए।
2- अवमानना करने वालों को नोटिस जारी करके उन्हें सुप्रीम कोर्ट के समक्ष व्यक्तिगत रूप से पेश होने का निर्देश दिया जाए ताकि वे बता सकें कि माननीय न्यायालय की अवमानना करने के लिए उन्हें सजा क्यों न दी जाए।
3- प्रतिवादियों को मेट्रो और रेलवे संचालन पर लगाए गए सभी पूर्ण प्रतिबंधात्मक आदेशों को तुरंत रद्द करने और तत्काल सार्वजनिक सूचना के साथ सख्ती से नियंत्रित संचालन कार्यक्रम लागू करने का तत्काल अंतरिम निर्देश जारी किया जाए।
