विराट, रोहित, अश्विन जैसे महान भारतीय खिलाड़ियों द्वारा संन्यास का ऐलान करने के बाद जब भारत के सर्वश्रेष्ठ टेस्ट बल्लेबाजों में शुमार चेतेश्वर पुजारा ने अचानक क्रिकेट के सभी प्रारूपों को अलविदा कहने का फैसला किया तो तमाम तरह के कारण निकलकर सामने आने लगे, सवाल यही है कि आखिर पुजारा ने ये फैसला क्यों लिया।
जो बल्लेबाज टेस्ट क्रिकेट में विरोधी टीमों को पूरा-पूरा दिन परेशान करने का दम रखता था, जिसके संयम के लोग कायल थे, आज उसी खिलाड़ी का संयम टूट गया और उसने क्रिकेट छोड़ने का निर्णय सुना दिया है। अब वो किसी भी फॉर्मेट में खेलते नहीं दिखेंगे।
संन्यास लेने से पहले ही चेतेश्वर पुजारा ने ब्रॉडकास्ट व कमेंट्री की दुनिया में कदम रख दिया था। वो लगातार टीवी पर नजर आते हैं और क्रिकेट एक्सपर्ट व कमेंटेटर के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। इसलिए उनका करियर का प्लान-बी पहले से ही तैयार था। अब वो ज्यादातर आपको माइक के साथ नजर आएंगे।
चेतेश्वर पुजारा इंग्लैंड में काउंटी क्रिकेट भी खेल रहे थे और शानदार प्रदर्शन कर रहे थे, बस टीम इंडिया में उनको जगह नहीं मिल पा रही थी, संन्यास लेने का एक कारण तो यही होगा कि अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट की उम्मीदें समाप्त होते देख उन्होंने पीछे हटने का फैसला ले लिया।
भारत के पूर्व महान ऑलराउंडर करसन गावरी ने चेतेश्वर पुजारा के अचानक संन्यास लेने के फैसले पर हैरानी जताई है। उनके मुताबिक पुजारा के अंदर अभी काफी क्रिकेट बाकी था। करसन गावरी ने अपने एक बयान में कुछ ऐसा कहा है जिस पर चर्चाएं शुरू हो गई हैं। क्या है उनका वो वो बयान, आइए जानते हैं।
गावरी ने कहा- ये मुमकिन है कि वो (पुजारा) शायद नजरअंदाज होने से कुंठा और खीझ से भर गए थे। देश के लिए इतने साल सेवा देने के बावजूद जब खिलाड़ी को मौके नहीं मिलते, कोई भी खीझ का शिकार हो जाएगा। इसी तरह विराट कोहली और रोहित शर्मा भी इंग्लैंड दौरे से पहले फ्रस्ट्रेशन का शिकार हुए होंगे।
करसन गावरी ने आगे और भी बड़ी बात कही, उन्होंने कहा- बीसीसीआई के अपने विचार होंगे, लेकिन अंत में खिलाड़ी परेशान व निराश होता है। ये खिलाड़ी करोड़ों रुपये की मांग नहीं कर रहे हैं। ये सिर्फ सम्मान की बात है और ये सभी खिलाड़ी विदाई टेस्ट मैच के हकदार थे 110 प्रतिशत।
इस पूर्व क्रिकेटर ने ये भी कहा कि जिन क्रिकेटरों ने 100 टेस्ट मैच खेले हैं उनको विदाई मैच देकर सम्मानित करना ही चाहिए। बीसीसीआई को ये सम्मान कोहली और पुजारा को देना चाहिए था क्योंकि वो इसके हकदार हैं। कोई भी अपने करियर का ऐसा अंत नहीं चाहता। पुजारा भी उन खास खिलाड़ियों में शामिल है जिन्होंने 100 टेस्ट मैच खेले।