हाल में जहां विराट कोहली और रोहित शर्मा ने सालों देश के लिए क्रिकेट खेलने के बाद टी20 और फिर टेस्ट क्रिकेट को अलविदा कहा तो उन्हें खूब सुर्खियां मिलीं, लेकिन अब एक और संन्यास हुआ है लेकिन उसको वो तवज्जो नहीं मिलती दिख रही जिसका वो हकदार है।
जो लोग भारतीय क्रिकेट को अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट और आईपीएल से हटकर भी समझते हैं, वो जानते होंगे कि प्रियांक पंचाल कौन हैं। एक शानदार बल्लेबाज जिसने सालों तक घरेलू क्रिकेट में पसीना बहाया और सफल भी हुआ लेकिन अब उसने क्रिकेट के सभी प्रारूपों से संन्यास लेने का फैसला सुना दिया है।
प्रियांक पंचाल का जन्म 9 अप्रैल 1990 को गुजरात के अहमदाबाद में हुआ था। वो दाएं हाथ के बल्लेबाज हैं और आमतौर पर ओपनिंग की जिम्मेदारी निभाते आए थे। प्रियांक ने अंडर-15 क्रिकेट में साल 2003 में पॉली उमरीगर ट्रॉफी खेलते हुए अपना दम दिखा दिया था उन्होंने अपने प्रथम श्रेणी क्रिकेट करियर (First Class Cricket) की शुरुआत 18 साल पहले साल 2008 में की थी। उन्होंने कई अन्य क्रिकेटरों की तरह कभी अपनी टीम नहीं बदली और हमेशा गुजरात क्रिकेट टीम के सदस्य रहे। वो तकरीबन 20 साल तक पेशेवर क्रिकेटर में सक्रिय रहे।
गुजरात के प्रियांक पंचाल ने 2008 में अपने करियर की शुरुआत लिस्ट-ए क्रिकेट (घरेलू वनडे टूर्नामेंट) के जरिए की और पहले ही मैच में 115 गेंदों में 123 रन बनाकर छाप छोड़ी। जब उन्होंने रणजी ट्रॉफी में डेब्यू किया तो पहले ही मैच में अपनी टीम को सौराष्ट्र के खिलाफ पारी के अंतर से बड़ी जीत दिलाने में अहम भूमिका निभाई। इसके बाद वो सालों साल घरेलू क्रिकेट खेलते रहे और रनों का अंबार लगाते रहे।
साल 2016 में प्रियांक पंचाल गुजरात के पहले क्रिकेटर बने जिसने रणजी ट्रॉफी में ट्रिपल सेंचुरी बनाई। उसके अगले ही महीने वो गुजरात के पहले खिलाड़ी बने जिसने एक रणजी सीजन में 1000 रन पूरे किए। फिर 2017-18 में भी वो रणजी ट्रॉफी में गुजरात का हाईएस्ट स्कोरर रहे, फिर एक और प्रतिष्ठित भारतीय वनडे टूर्नामेंट विजय हजारे ट्रॉफी में वो 2018-19 सीजन में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाज बने। वो दलीप ट्रॉफी में इंडिया रेड टीम के कप्तान भी बनाए गए।
दिसंबर 2021 में प्रियांक को पहली बार दक्षिण अफ्रीका दौरे के लिए भारतीय टेस्ट टीम में चोटिल रोहित शर्मा की जगह शामिल किया गया। लेकिन मैदान पर नहीं उतारा गया। फिर फरवरी 2022 में श्रीलंका के खिलाफ टेस्ट सीरीज के लिए टीम इंडिया में जगह मिली, लेकिन पूरी सीरीज निकल गई और मौका नहीं दिया गया। अब काफी इंतजार के बाद उन्होंने सारी उम्मीदें छोड़ दीं और क्रिकेट को अलविदा कहने का फैसला ले लिया।
प्रियांक पंचाल ने सोशल मीडिया पर अपना जो विदाई संदेश पोस्ट किया है उसने क्रिकेट जगत को भावुक कर दिया। इसमें उन्होंने अपने जीवन में अपने स्वर्गीय पिता के योगदान का अच्छी तरह उल्लेख किया है। पिता ही प्रेरित करते थे और उनका सपना था कि बेटा एक दिन देश के लिए खेले। लेकिन वो इस सपने को पूरा होता नहीं देख पाए। मेरे भारत के लिए खेलने के उनके इस सपने को पूरा होने का इंतजार मैंने दो दशक तक किया, हर सीजन किया, आज भी कर रहा हूं। मैं प्रियांक पचाल अब क्रिकेट को अलविदा कहता हूं।
प्रियांक ने 127 प्रथम श्रेणी क्रिकेट मैचों में 8856 रन बनाए जिस दौरान उनके बल्ले से 29 शतक और 34 अर्धशतक निकले। उनका बेस्ट स्कोर नाबाद 314 रन की पारी रही। वहीं, लिस्ट-ए क्रिकेट (वनडे) में 97 मैच खेलकर 3672 रन बनाए जिसमें उनके नाम 8 शतक और 21 अर्धशतक रहे और बेस्ट स्कोर 136 रन की पारी रही। वहीं घरेलू टी20 क्रिकेट में 59 मैच खेलते हुए 1522 रन बनाए जिसमें 9 अर्धशतक लगाए। इसके अलावा उन्होंने घरेलू क्रिकेट में 24 विकेट भी झटके।