हिन्दू धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पढ़ाई और शिक्षा के क्षेत्र की देवी मां सरस्वती को माना गया है। माना जाता है कि सरस्वती माता की उपासना से बुद्धि और ज्ञान में बढ़ोतरी होती है।
कहा जाता है कि सृष्टि की रचना के बाद भगवान विष्णु से अनुमति लेकर ब्रह्मा जी ने एक चतुर्भुजी स्त्री की रचना की, जिनके एक हाथ में वीणा थी तो उनका दूसरा हाथ वर मुद्रा में था। वहीं देवी के अन्य दो हाथों में से एक में पुस्तक तो दूसरे में माला थी। इनके मुख से निकलने वाले शब्द इतने मधुर थे जिसके चलते इन देवी का नाम पड़ा सरस्वती।
सरस्वती देवी ज्ञान, बुद्धि, वाणी और संवेदना से परिपूर्ण हैं। उनकी वीणा संगीत की अभिव्यक्ति है तो पुस्तक विचारणा की अभिव्यक्ति मानी गई है और वहीं उनका वाहन हंस कला की अभिव्यक्ति माना जाता है।
दिवाली के अलावा बसंत पंचमी का दिन मां सरस्वती की अराधना के लिए शुभ माना जाता है। कहते हैं इसी दिन माता की उत्पत्ति हुई थी।
सरस्वती मां को शारदा, शतरुपा, वीणावादिनी जैसे अन्य नामों से भी जाना जाता है। मां सरस्वती को हिंदू धर्म की प्रमुख देवियों में से एक माना गया है।
माता सरस्वती का प्रिय रंग पीला माना जाता है। इसलिए इनकी पूजा में इस रंग के चीजों का ज्यादा इस्तेमाल किया जाता है।
कहते हैं अगर किसी परीक्षा में जाने से पहले मां सरस्वती की सच्चे मन से अराधना की जाए तो उस परीक्षा में सफलता मिलने के आसार बढ़ जाते हैं।
मां सरस्वती को प्रसन्न करना चाहते हैं तो सरस्वती वंदना का नियमित पाठ करना चाहिए। इससे मां की कृपा शीघ्र ही प्राप्त हो जाती है।
सरस्वती वंदना के पाठ से मन पर काबू पाया जा सकता है। जिससे मन जरूरी कार्यों के समय भटकता नहीं है।
बच्चों को प्रतिदिन मां सरस्वती के "ॐ ऐं सरस्वत्यै नमः" इस मंत्र का जाप अवश्य करना चाहिए।