महाशिवरात्रि व्रत में अक्सर होती है ये चूक, आखिरी वाली है सबसे कॉमन मिस्टेक, पानी को लेकर ये गलती करते हैं भक्त

Mahashivratri vrat common mistakes: महाशिवरात्रि के दिन भगवान शिव का माता पार्वती के साथ विवाह संपन्न हुआ था, साथ ही भोलेनाथ पहली बार ज्योतिर्लिंग के रूप में प्रकट हुए थे। इस वजह से महाशिवरात्रि का व्रत शिव भक्त पूरी श्रद्धा से करते हैं। लेकिन फिर भी कुछ गलतियां हो जाती हैं। आखिरी वाली तो अधिकतर भक्त कर जाते हैं। यहां देखें महाशिवरात्रि व्रत को लेकर किन बातों पर सावधान रहें।

Authored by: मेधा चावलाUpdated Feb 15 2026, 07:44 IST
महाशिवरात्रि का व्रतImage Credit : Canva01 / 07

महाशिवरात्रि का व्रत

महाशिवरात्रि के दिन भगवान शिव की पूजा करने का विशेष महत्व है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ था। महाशिवरात्रि के दिन पूजा के साथ व्रत भी रखा जाता है। इस दिन व्रत के नियमों का पालन करना बेहद जरूरी है। कहा जाता है कि अगर व्रत अच्छे से न रखा जाए तो व्रत का पूरा लाभ नहीं मिलता। साथ ही भगवान शिव नाराज भी हो जाते हैं। तो आइए जानते हैं इस दिन क्या गलतियां भूलकर भी नहीं करनी चाहिए।

उपवास को अहंकार की चुनौती न बनाएंImage Credit : Canva02 / 07

उपवास को अहंकार की चुनौती न बनाएं

सबसे बड़ी गलती यह है कि लोग व्रत को अपनी ताकत दिखाने का जरिया बना लेते हैं। 'मैं पानी भी नहीं पियूंगा' या 'मैं पूरी रात जागूंगा, चाहे कुछ भी हो'... जैसी सोच रखना भक्ति नहीं, बल्कि अहंकार है। अनुशासन जरूरी है, लेकिन जब शरीर थक जाए और मन चिड़चिड़ा हो जाए, तो व्रत का असली उद्देश्य खत्म हो जाता है। शिव संतुलन के प्रतीक हैं, आत्म-दंड के नहीं। इसलिए व्रत को शांति और संतुलन के साथ रखें, न कि खुद को सज़ा देने के भाव से

व्रत के खाने का ज्यादा सेवन न करेंImage Credit : Canva03 / 07

व्रत के खाने का ज्यादा सेवन न करें

महाशिवरात्रि के दिन कई लोग व्रत के नाम पर सामान्य दिनों से भी ज्यादा भारी खाना खा लेते हैं। तली हुई साबूदाना, व्रत के पकौड़े, मीठी चीजें और बार-बार स्नैक्स लेने से शरीर सुस्त हो जाता है। जबकि उपवास का असली उद्देश्य शरीर और मन का भार कम करना है, न कि बस एक मेन्यू को दूसरे से बदल देना। इसलिए व्रत में हल्का और साफ-सुथरा भोजन खाएं।

उपवास करते समय लड़ाई या बहस न करें Image Credit : Canva04 / 07

उपवास करते समय लड़ाई या बहस न करें

भूख की वजह से धैर्य कम हो सकता है और छोटी-छोटी बातें भी बड़े झगड़े में बदल सकती हैं। लेकिन गुस्से के साथ रखा गया व्रत अपना अर्थ खो देता है। महाशिवरात्रि का उद्देश्य नेगेटिविटी को दूर करना और मन को शांत करना है। अगर आपके शब्द कठोर हो जाएं और व्यवहार चिड़चिड़ा हो जाए, तो व्रत सिर्फ दिखावा बनकर रह जाता है। इसलिए इस दिन धैर्य, शांति और पॉजिटिविटी बनाए रखना सबसे जरूरी है।

रात्रि पूजन में ध्यान लगाएंImage Credit : Canva05 / 07

रात्रि पूजन में ध्यान लगाएं

रात में जागना तब असरदार होता है जब इसे पूरी तरह से ध्यान से किया जाए। लेकिन कई लोग ध्यान की जगह फोन या सोशल मीडिया पर समय बर्बाद कर देते हैं। जागरण का मतलब सिर्फ जागते रहना नहीं, बल्कि सच में ध्यान लगाना और मन का शांति में होना जरूरी है। अगर आप रात में जागरण करते हैं, तो सोशल मीडिया का इस्तेमाल कम करें। इस दिन के पावन अवसर पर मौन में बैठें, ध्यानपूर्वक मंत्र सुनें और अपने मन को शांत और संतुलित होने दें।

व्रत से एक दिन पहले सात्विक भोजन करेंImage Credit : Canva06 / 07

व्रत से एक दिन पहले सात्विक भोजन करें

बहुत लोग व्रत से एक दिन पहले सात्विक भोजन लेना भूल जाते हैं। रात को भारी, तला और मसालेदार खाना खा लेते हैं, जिससे अगले दिन उपवास रखना मुश्किल हो जाता है। प्याज, लहसुन और ज्यादा मसाले वाला खाना शरीर को बेचैन कर देता है। इसलिए पिछली शाम हल्का और साधारण सात्विक भोजन लें, जिससे पाचन और मन दोनों व्रत के लिए तैयार रहें। ध्यान रखें व्रत की तैयारी भी उतनी ही जरूरी है जितना उपवास खुद।

सिर्फ तन का ही नहीं, मन का भी उपवास रखे    Image Credit : Canva07 / 07

सिर्फ तन का ही नहीं, मन का भी उपवास रखे

सबसे बड़ी गलती यह है कि लोग व्रत में सिर्फ भोजन पर ध्यान देते हैं। अनाज तो छोड़ते हैं, लेकिन बात-बात पर गपशप या झगड़ा नहीं रोकते। कुछ खाने-पीने की चीज़ों से तो बचते हैं, लेकिन अहंकार और क्रोध से नहीं। असली उपवास तो क्रोध, अधिक प्रतिक्रिया और बेकार की बातें छोड़ने में है। अगर यह हिस्सा गायब हो, तो व्रत का असली अर्थ अधूरा ही रह जाता है।

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