हर साल चैत्र पूर्णिमा के दिन हनुमान जयंती का पावन पर्व मनाया जाता है जो इस बार 12 अप्रैल को मनाया जा रहा है। हर साल की तरह ही इस साल भी कई लोग इस बात को लेकर कन्फ्यूजन में हैं कि इसे जयंती कहना ज्यादा सही है या जन्मोत्सव। साथ ही इन दोनों शब्दों में अंतर क्या है? तो सबसे पहले तो आपको ये बता दें कि ये दोनों ही शब्द जन्मदिन के उत्सव से जुड़े हैं। लेकिन फिर भी दोनों के बीच में अंतर है। चलिए इसके बारे में आगे समझते हैं।
जयंती का प्रयोग उन लोगों के लिए किया जाता है जो अब जीवित नहीं हैं। आसान शब्दों में समझे तो मरे हुए लोगों के जन्मदिन को जयंती का नाम दिया जाता है। जैसे गांधी जयंती, अंबेडकर जयंती इत्यादि।
जन्मोत्सव शब्द उन लोगों के लिए प्रयोग किया जाता है जो अभी जीवित हैं या फिर अमर हैं। धार्मिक मान्यताओं अनुसार भगवान हनुमान को कलयुग का अमर देवता कहा जाता है। ये हिंदू धर्म के 8 चिरंजीवी में से एक हैं। इसलिए इनके जन्मदिन को जन्मोत्सव कहना ज्यादा उचित है।
जब कोई अमर होता है तो वहां जयंती शब्द का प्रयोग करना सही नहीं है। हनुमान जी के अलावा अन्य सभी देवी-देवताओं को भी अमर माना जाता है इसलिए उनके जन्मदिन को भी जन्मोत्सव कहना ज्यादा सही रहेगा। जैसे कृष्ण जन्मोत्सव, श्री राम जन्मोत्सव, हनुमान जन्मोत्सव।