Mission Shukrayaan: चंद्रयान की तरह ही शुक्रयान मिशन भी इसरो के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। दरअसल, शुक्र ग्रह को पृथ्वी का जुड़वां ग्रह भी माना जाता है, क्योंकि दोनों ग्रहों का आकार और घनत्व लगभग एक समान है। ऐसे में शुक्र ग्रह का अध्ययन पृथ्वी के विकास और जलवायु को समझगे में मददगार साबित हो सकता है।
ISRO Venus Mission: इसरो एक बेहद खास अंतरिक्ष यान को शुक्र ग्रह की कक्षा में स्थापित करेगा, जो शुक्र की परिक्रमा लगाएगा। इस दौरान अंतरिक्ष यान शुक्र ग्रह की सतह व उपसतह, वायुमंडलीय प्रक्रियाओं और ग्रह पर होने वाले सूर्य के प्रभाव की जानकारी एकत्रित करेगा।
ISRO's Mission: शुक्र ग्रह का निर्माण पृथ्वी के समान परिस्थितियों में हुआ है, जो यह समझने का एक अनूठा अवसर प्रदान करता है कि ग्रहों का वातावरण किस प्रकार बहुत अलग तरीके से विकसित हो सकता है।
Shukrayaan Mission: शुक्र ग्रह का वायुमंडल बेहद घना और विषैला है। ऐसे में शुक्रयान मिशन के माध्यम से वैज्ञानिक वायुमंडल की संरचना, तापमान और गैसों की मात्रा का अध्ययन करेंगे, जो शुक्र और पृथ्वी दोनों ग्रहों के विकास को समझने में काफी सहायक सिद्ध होगा।
Venus Orbiter Mission: केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 'वीनस ऑर्बिटर मिशन' के लिए 1,236 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं जिनमें से 824 करोड़ रुपये इसरो अंतरिक्ष यान को बनाने में खर्च कर सकती है।
Mission Venus: इसरो के वैज्ञानिकों ने शुक्रयान मिशन की तैयारी शुरू कर दी है। ऐसा माना जा रहा है कि अगर सबकुछ ठीक रहा तो इसरो शुक्रयान मिशन को 2028 में लॉन्च कर सकता है।