नौतपा साल के सबसे गर्म माने जाने वाले 9 दिनों का दौर होता है, जिसकी शुरुआत सूर्य के रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करने से मानी जाती है। आमतौर पर यह मई के आखिरी और जून की शुरुआत में पड़ता है। इस दौरान सूर्य की किरणें सीधे धरती पर पड़ती हैं, जिससे तापमान तेजी से बढ़ जाता है। भारत के कई हिस्सों में लोग इस समय भीषण गर्मी और लू का सामना करते हैं।
नौतपा के समय तक धरती कई हफ्तों की धूप से पूरी तरह गर्म हो चुकी होती है। हवा में नमी कम रहती है और आसमान साफ होने के कारण सूरज की तपिश सीधे जमीन तक पहुंचती है। इसी वजह से तापमान सामान्य दिनों की तुलना में ज्यादा महसूस होता है। कई राज्यों में हीटवेव जैसी स्थिति भी बन जाती है।
वैज्ञानिक मानते हैं कि नौतपा की तेज गर्मी मॉनसून के लिए जरूरी होती है। ज्यादा गर्मी पड़ने से जमीन पर लो-प्रेशर एरिया बनता है, जो समुद्र से नमी भरी हवाओं को भारत की तरफ खींचता है। यही हवाएं आगे चलकर मॉनसून की बारिश लाती हैं। इसलिए कहा जाता है कि नौतपा जितना तपेगा, मॉनसून उतना बेहतर होगा।
भारतीय प्रायद्वीप में पड़ने वाली गर्मी ही एक तरह से मानूसन के खींचने का काम करती है। अगर गर्मी ठीक से नहीं पड़ी प्रायद्वीप और महासागरों के बीच तापमान का अंतर नहीं बनेगा और इससे नमी वाली हवा जमीनी इलाकों में पहुंचने में दिक्कत होती है और पर्याप्त बारिश देखने को मिलती है। इसी को हम मानसून की कमी या कमजोरी के रूप में पहचाते हैं।
नौतपा के दौरान अगर बारिश होती है तो भारतीय प्रायद्वीप उतना गर्म नहीं होता है जितना की उसे होना चाहिए और इसका नतीजा यही होता है कि प्रायद्वीप और महासागरों की बीच तापमान का जो अंतर होना चाहिए वह नहीं होता है। इसे बेहतर तरह से कहें तो महासगरों की नमी और ज्यादा गर्म इलाकों की ओर चली जाती है और मध्य और उत्तर भारत में मानसून कमजोर हो जाता है।
किसानों के लिए नौतपा बेहद अहम माना जाता है क्योंकि यह खरीफ फसलों की तैयारी का समय होता है। मान्यता है कि अच्छी गर्मी पड़ने से जमीन मॉनसून के लिए तैयार हो जाती है। इससे मिट्टी में नमी संतुलित रहती है और फसलों की पैदावार बेहतर होने की उम्मीद बढ़ती है। ग्रामीण इलाकों में आज भी लोग नौतपा को खेती से जोड़कर देखते हैं।
नौतपा के दौरान शरीर को डिहाइड्रेशन और हीट स्ट्रोक से बचाना बेहद जरूरी है। ज्यादा से ज्यादा पानी पीना चाहिए और दोपहर की तेज धूप में बाहर निकलने से बचना चाहिए। हल्का भोजन, छाछ, नींबू पानी और मौसमी फल शरीर को ठंडा रखने में मदद करते हैं। अगर चक्कर, कमजोरी या तेज बुखार जैसे लक्षण दिखें तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।