केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि सेमीकॉन 2.0 योजना पूरी होने तक भारत स्वदेशी चिप के डिजाइन और उत्पादन में आत्मनिर्भर बनने की स्थिति में होगा। इस योजना का मुख्य फोकस देश में ही चिप बनाने की क्षमता विकसित करना है। आज मोबाइल फोन, कंप्यूटर, इलेक्ट्रिक वाहन, रक्षा उपकरण, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और कई आधुनिक तकनीकों में सेमीकंडक्टर चिप की जरूरत होती है। ऐसे में घरेलू स्तर पर चिप निर्माण बढ़ने से भारत को तकनीकी क्षेत्र में बड़ी मजबूती मिलेगी।
सरकार को उम्मीद है कि इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 के जरिए करीब चार लाख करोड़ रुपये का निवेश आकर्षित होगा। इसके अलावा योजना अवधि के दौरान लगभग दो लाख करोड़ रुपये मूल्य के सेमीकंडक्टर उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है। इस योजना से देश में नई फैक्ट्रियां स्थापित होंगी, रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और भारत वैश्विक सेमीकंडक्टर बाजार में अपनी मजबूत पहचान बना सकेगा।
सरकार ने इस बार केवल चिप बनाने वाली कंपनियों पर ही ध्यान नहीं दिया है, बल्कि पूरी सेमीकंडक्टर वैल्यू चेन को मजबूत करने की योजना बनाई है। नई योजना में चिप निर्माण के लिए जरूरी कच्चे माल जैसे विशेष खनिज, गैस और अन्य जरूरी संसाधनों की आपूर्ति करने वाली कंपनियों को भी प्रोत्साहन दिया जाएगा। इससे देश में सेमीकंडक्टर उद्योग का पूरा इकोसिस्टम तैयार होगा और विदेशी सप्लाई पर निर्भरता कम होगी।
अश्विनी वैष्णव के अनुसार, सेमीकॉन 2.0 को छह प्रमुख स्तंभों के आधार पर आगे बढ़ाया जाएगा। इसमें सबसे पहला स्तंभ चिप डिजाइन को बनाया गया है। इस योजना के तहत भारत में अत्याधुनिक चिप डिजाइन करने वाली कंपनियों को बढ़ावा दिया जाएगा। इसके साथ ही चिप निर्माण, पैकेजिंग, टेस्टिंग और अन्य तकनीकी क्षेत्रों को भी विकसित किया जाएगा। सरकार का लक्ष्य है कि भारत केवल चिप का उपभोक्ता न रहे, बल्कि दुनिया के प्रमुख चिप निर्माता देशों में शामिल हो।
भारत सरकार ने सेमीकंडक्टर मिशन के पहले चरण यानी ISM 1.0 के लिए 76,000 करोड़ रुपये का बजट रखा था। इसके तहत सरकार ने करीब 1.64 लाख करोड़ रुपये के कुल निवेश वाली 12 परियोजनाओं को मंजूरी दी है। इन परियोजनाओं में घरेलू कंपनियों की बड़ी भूमिका रही है। खासतौर पर टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स और उसकी सेमीकंडक्टर इकाई ने इस क्षेत्र में बड़ा निवेश किया है। पहले चरण से मिली सफलता के बाद सरकार ने अब मिशन के दूसरे चरण को और बड़े स्तर पर शुरू करने का फैसला किया है।
वैश्विक स्तर पर इस समय सेमीकंडक्टर चिप की मांग तेजी से बढ़ रही है। खासकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), इलेक्ट्रिक वाहन और स्मार्ट डिवाइस के बढ़ते इस्तेमाल के कारण चिप की जरूरत लगातार बढ़ रही है। दुनिया के कई देश मेमोरी चिप की कमी जैसी समस्याओं का सामना कर रहे हैं। ऐसे समय में भारत का सेमीकंडक्टर मिशन देश को वैश्विक चिप सप्लाई चेन में महत्वपूर्ण भूमिका दिला सकता है।
इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 भारत की तकनीकी आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इससे देश में नई तकनीक, निवेश और रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। सरकार का लक्ष्य है कि आने वाले वर्षों में भारत अपनी जरूरतों के लिए खुद चिप तैयार करे और वैश्विक बाजार में भी सेमीकंडक्टर उत्पादन का बड़ा केंद्र बने। सेमीकॉन 2.0 के जरिए भारत डिजिटल अर्थव्यवस्था को और मजबूत करने की तैयारी कर रहा है।