अगर 2 डिग्री बढ़ जाए धरती का तापमान तो कैसे होंगे हालात, क्या पिघल जाएगी दुनिया की सारी बर्फ

वैज्ञानिकों की यह चिंता लंबे समय से बनी हुई है कि वातावरण का तापमान ज्यादा नहीं होना चाहिए । बढ़ते तापमान पर दुनिया के सभी वैज्ञानिकों ने चिंता जाहिर की है। एक सर्वे के मुताबिक सदी के अंत तक हिंदू कुश पर्वत से 75 प्रतिशत बर्फ पिघलने की आशंका है।

Slideshow/s by: संजीव कुमार दुबेUpdated May 30 2025, 13:49 IST
2 डिग्री तापमान बढ़ने पर क्या होगा Image Credit : Photo curtesy-(freepik)01 / 06

2 डिग्री तापमान बढ़ने पर क्या होगा

अगर वैश्विक तापमान में दो डिग्री सेल्सियस की वृद्धि होती है तो हिंदू कुश हिमालय के ग्लेशियर की बर्फ सदी के अंत तक 75 प्रतिशत तक कम हो सकती है। हिंदू कुश पर्वत के ये ग्लेशियर कई नदियों का उद्गम स्थल हैं जिनमें इन्हीं ग्लेशियर से पानी आता है और ये नदियां दो अरब लोगों की आजीविका का साधन बनती हैं। एक नए अध्ययन में ये जानकारी सामने आई है।

ग्लेशियर की 40-45 प्रतिशत बर्फ संरक्षित रहेगीImage Credit : Photo curtesy-(freepik)02 / 06

ग्लेशियर की 40-45 प्रतिशत बर्फ संरक्षित रहेगी

विज्ञान पत्रिका ‘साइंस’ में प्रकाशित अध्ययन में कहा गया है कि यदि देश तापमान वृद्धि को पूर्व-औद्योगिक स्तर से 1.5 डिग्री सेल्सियस तक सीमित कर सकें तो हिमालय और कॉकेशस पर्वत में ग्लेशियर की 40-45 प्रतिशत बर्फ संरक्षित रहेगी।अध्ययन में पाया गया कि इसके विपरीत अगर इस सदी के अंत तक दुनिया 2.7 डिग्री सेल्सियस गर्म होती है, तो वैश्विक स्तर पर ग्लेशियर की बर्फ का केवल एक-चौथाई हिस्सा ही बचेगा।

2020 के स्तर पर केवल 10-15 प्रतिशत ही बर्फ बची रह पाएगीImage Credit : Photo curtesy-(freepik)03 / 06

2020 के स्तर पर केवल 10-15 प्रतिशत ही बर्फ बची रह पाएगी

अध्ययन में कहा गया है कि मानव समुदायों के लिए सबसे महत्वपूर्ण ग्लेशियर क्षेत्र जैसे कि यूरोपीयन आल्प्स, पश्चिमी अमेरिका और कनाडा की पर्वत श्रृंखलाएं तथा आइसलैंड विशेष रूप से बुरी तरह प्रभावित होंगे।दो डिग्री सेल्सियस तापमान पर ये क्षेत्र अपनी लगभग सारी बर्फ खो सकते हैं और 2020 के स्तर पर केवल 10-15 प्रतिशत ही बर्फ बची रह पाएगी।

स्कैंडिनेविया पर्वत का भविष्य होगा और भी भयावह!Image Credit : Photo curtesy-(freepik)04 / 06

स्कैंडिनेविया पर्वत का भविष्य होगा और भी भयावह!

स्कैंडिनेविया पर्वत का भविष्य और भी भयावह हो सकता है, क्योंकि इस स्तर के तापमान में वहां ग्लेशियर पर बर्फ बचेगी ही नहीं। अध्ययन में इस बात पर प्रकाश डाला गया है कि 2015 के पेरिस समझौते द्वारा निर्धारित 1.5 डिग्री सेल्सियस के लक्ष्य तक तापमान को सीमित करने से सभी क्षेत्रों में कुछ ग्लेशियर बर्फ को संरक्षित करने में मदद मिलेगी।

पिघलते ग्लेशियर से खतरे में जीवन Image Credit : Photo curtesy-(freepik)05 / 06

पिघलते ग्लेशियर से खतरे में जीवन

एशियाई विकास बैंक के उपाध्यक्ष यिंगमिंग यांग ने दुशांबे में कहा कि पिघलते ग्लेशियर अभूतपूर्व पैमाने पर जीवन को खतरे में डाल रहे हैं, जिसमें एशिया में दो अरब से अधिक लोगों की आजीविका भी शामिल है। ग्रह को गर्म करने वाले उत्सर्जन को कम करने के लिए स्वच्छ ऊर्जा को अपनाना ही ग्लेशियरों के पिघलने की गति को धीमा करने का सबसे प्रभावी तरीका है।

तापमान में मामूली वृद्धि भी मुसीबत का सबब Image Credit : Photo curtesy-(freepik)06 / 06

तापमान में मामूली वृद्धि भी मुसीबत का सबब

व्रीजे यूनिवर्सिटी ब्रसेल में अध्ययन के सह-प्रमुख लेखक डॉ. हैरी जेकोलारी ने कहा कि हमारे अध्ययन से यह स्पष्ट हो गया है कि तापमान में मामूली वृद्धि भी मायने रखती है। आज हम जो चयन करेंगे, उसका असर सदियों तक रहेगा और यह तय करेगा कि हमारे ग्लेशियरों का कितना हिस्सा संरक्षित किया जा सकता है।

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