इसका जवाब है- हां, लेकिन तब जब वो एयरक्राफ्ट को हिट करने में सफल हो जाए, लेकिन यह अत्यंत ही मुश्किल है, किसी भी मिसाइल का एयरक्राफ्ट कैरियर तक पहुंचना ही एक तरह से नामुमकिन है। एयरक्राफ्ट कैरियर अकेले नहीं होता है, इसके साथ पूरा फाइटर ग्रुप होता है, जिसमें डिस्ट्रॉयर, सबमरीन, फ्रिगेट्स, लड़ाकू विमान, हेलीकॉप्टर शामिल होते हैं। इसके अलावा एयरक्राफ्ट कैरियर के पास खुद का डिफेंस सिस्टम होता है, जो किसी भी मिसाइल को हवा में ही नष्ट कर देता है। एयरक्राफ्ट कैरियर की सुरक्षा एक “लेयर्ड डिफेंस सिस्टम” पर आधारित होती है—पहचान, इंटरसेप्शन, एस्कॉर्ट सुरक्षा, नजदीकी हथियार और इलेक्ट्रॉनिक सुरक्षा। इसी बहुस्तरीय व्यवस्था के कारण किसी भी मिसाइल के लिए सीधे विमानवाहक पोत को निशाना बनाना बेहद कठिन होता है।
एयरक्राफ्ट कैरियर (विमानवाहक पोत) दुनिया के सबसे सुरक्षित और बहु-स्तरीय रक्षा तंत्र वाले युद्धपोतों में गिने जाते हैं। ये अकेले नहीं चलते, बल्कि एक पूरे कैरियर स्ट्राइक ग्रुप के साथ समुद्र में तैनात रहते हैं। किसी भी मिसाइल हमले से बचाव के लिए इनकी सुरक्षा कई परतों में काम करती है। एयरक्राफ्ट कैरियर (विमानवाहक पोत) दुनिया के सबसे सुरक्षित और बहु-स्तरीय रक्षा तंत्र वाले युद्धपोतों में गिने जाते हैं। ये अकेले नहीं चलते, बल्कि एक पूरे कैरियर स्ट्राइक ग्रुप के साथ समुद्र में तैनात रहते हैं। किसी भी मिसाइल हमले से बचाव के लिए इनकी सुरक्षा कई परतों में काम करती है।
किसी भी एयरक्राफ्ट के डिफेंस का पहला लेटर उसके साथ चलने वाले रडार सिस्टम, समुद्री निगरानी विमान और AWACS (एयरबोर्न वार्निंग एंड कंट्रोल सिस्टम) होते हैं। जो सैकड़ों किलोमीटर दूर से दुश्मन के विमान या मिसाइल का पता लगा लेते हैं। इससे पहले ही इंटरसेप्शन की तैयारी शुरू हो जाती है।
दूसरे लेयर में फाइटर जेट्स आते हैं। कैरियर पर तैनात लड़ाकू विमान हवा में ही दुश्मन के बमवर्षक या मिसाइल लॉन्च करने वाले प्लेटफॉर्म को निशाना बना लेते हैं। जिससे आसमान से आने वाले खतरे को आसानी से नष्ट कर दिया जाता है, जिसके कारण एयरक्राफ्ट कैरियर तक ये खतरे पहुंचते ही नहीं है।
एयरक्राफ्ट कैरियर की सुरक्षा के तीसरे लेयर में एस्कॉर्ट युद्धपोतों की रक्षा शामिल होती है। कैरियर स्ट्राइक ग्रुप में मिसाइल डिफेंस से लैस विध्वंसक और फ्रिगेट्स शामिल होते हैं, जिनके पास लंबी दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलें होती हैं। ये दुश्मन की क्रूज या बैलिस्टिक मिसाइलों को हवा में ही मार गिराने की क्षमता रखते हैं। चौथी परत खुद कैरियर की नजदीकी रक्षा प्रणाली होती है। यह एक स्वचालित तेज-फायरिंग गन सिस्टम होता है, जो अंतिम क्षणों में आने वाली मिसाइल को नष्ट कर देता है। इसके अलावा डिकॉय सिस्टम भी होते हैं, जो दुश्मन की मिसाइल को भ्रमित कर असली लक्ष्य से दूर कर देते हैं। इसके साथ ही इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सिस्टम दुश्मन की रडार गाइडेंस को जाम कर सकते हैं।
किसी भी एयरक्राफ्ट कैरियर के लिए सबसे घातक दुश्मन अगर कोई होता है तो वो सबमरीन है। पानी के अंदर छिपे होने के कारण इसका पता लगाना थोड़ा मुश्किल होता है और आधुनिक पनडुब्बियां, एयरक्राफ्ट कैरियर के काफी नजदीक भी पहुंच सकती हैं। लेकिन एयरक्राफ्ट कैरियर इससे भी बचने में सक्षम होता है। एयरक्राफ्ट कैरियर सबमरीन से बचाव के लिए “लेयर्ड एंटी-सबमरीन डिफेंस” अपनाता है-सोनार निगरानी, हेलिकॉप्टर गश्त, एस्कॉर्ट युद्धपोतों की सुरक्षा, रणनीतिक चाल और कभी-कभी अपनी पनडुब्बी की मौजूदगी। यही कारण है कि खुले समुद्र में किसी सबमरीन के लिए सीधे एयरक्राफ्ट कैरियर तक पहुंचना बेहद कठिन होता है।
द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान कई बड़े कैरियर डूबे थे। उदाहरण के तौर पर जापान का जापानी विमानवाहक पोत शिनानो 1944 में अमेरिकी पनडुब्बी के टॉरपीडो हमले से डूब गया था। इसी तरह जापान के चार बड़े विमानवाहक पोत 1942 की मिडवे की लड़ाई में नष्ट हुए थे। अमेरिका का USS Lexington भी 1942 में कोरल सागर की लड़ाई के दौरान डूब गया था।