अंतरिक्ष में इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन क्यों लगाते रहता है चक्कर, एक जगह क्यों नहीं रहता स्थिर?

अंतरिक्ष में स्थित इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS), स्थिर नहीं रहते हैं और लगातार पृथ्वी के चारों ओर चक्कर लगाते रहते हैं। आईएसएस का निर्माण 1998 में शुरू हुआ था और इसमें संयुक्त राज्य अमेरिका (नासा), रूस (रोसकॉसमॉस), जापान (जेएएक्सए), कनाडा (सीएसए), और यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ईएसए) के योगदान शामिल हैं। आईएसएस पृथ्वी की निचली कक्षा में 370-460 किलोमीटर की ऊंचाई पर परिक्रमा करता है। इंटरनेशनल स्पीड स्टेशन इतना तेजी से घूमता है कि 90 मिनट का यहां एक दिन होताहै। अब सवाल ये है कि ISS हमेशा घूमते क्यों रहता है, कभी रुकता क्यों नहीं, एक जगह स्थिर क्यों नहीं रहता?

Authored by: शिशुपाल कुमारUpdated Jul 25 2025, 07:37 IST
स्पेस स्टेशन के चक्कर लगाने के कारणImage Credit : NASA01 / 07

स्पेस स्टेशन के चक्कर लगाने के कारण

स्पेस स्टेशन पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र में स्थित होता है। यदि यह अपनी गति को धीमा कर देता है, तो पृथ्वी का गुरुत्वाकर्षण इसे अपनी ओर खींच लेता है, जिससे यह पृथ्वी पर गिर सकता है। वहीं, यदि यह अत्यधिक गति से चलता है, तो यह पृथ्वी से दूर चला जाएगा। इसलिए, स्पेस स्टेशन को एक विशेष गति से चलना पड़ता है, जो पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण बल के साथ संतुलन बनाए रखे। (फोटो- NASA)

माइक्रोग्रैविटी (Microgravity) का प्रभावImage Credit : NASA02 / 07

माइक्रोग्रैविटी (Microgravity) का प्रभाव

स्पेस स्टेशन में गुरुत्वाकर्षण बल बहुत कम होता है, जिसे माइक्रोग्रैविटी कहा जाता है। इस स्थिति में, सभी वस्तुएं और लोग एक जैसी गति से गिरते हैं, जिससे वे एक दूसरे के सापेक्ष स्थिर दिखाई देते हैं। इसलिए, स्पेस स्टेशन में "तैरने" की स्थिति उत्पन्न होती है, और यह स्थिर नहीं रहता। (फोटो- NASA)

स्पेस स्टेशन की गतिImage Credit : NASA03 / 07

स्पेस स्टेशन की गति

अंतरराष्ट्रीय स्पेस स्टेशन की गति लगभग 28,000 किलोमीटर प्रति घंटे होती है, जिससे यह हर 90 मिनट में पृथ्वी का एक चक्कर पूरा करता है। इस गति से, यह पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र में संतुलित रहता है और पृथ्वी पर गिरने से बचता है। (फोटो- NASA)

पृथ्वी की कक्षा में स्थित होनाImage Credit : NASA04 / 07

पृथ्वी की कक्षा में स्थित होना

स्पेस स्टेशन पृथ्वी की निम्न कक्षा (Low Earth Orbit) में स्थित होता है, जो पृथ्वी की सतह से लगभग 400 किलोमीटर ऊपर होती है। इस कक्षा में, पृथ्वी का गुरुत्वाकर्षण बल पर्याप्त होता है, जिससे स्पेस स्टेशन को पृथ्वी के चारों ओर चक्कर लगाने की आवश्यकता होती है। (फोटो- NASA)

स्पेस स्टेशन का निर्माण और उद्देश्यImage Credit : NASA05 / 07

स्पेस स्टेशन का निर्माण और उद्देश्य

स्पेस स्टेशन का निर्माण विभिन्न देशों की अंतरिक्ष एजेंसियों द्वारा संयुक्त रूप से किया गया है, जिसमें नासा, रूस की रोस्कोस्मोस, यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ESA), कनाडा और जापान शामिल हैं। इसका मुख्य उद्देश्य अंतरिक्ष में वैज्ञानिक अनुसंधान करना और पृथ्वी के बाहर जीवन की संभावना का अध्ययन करना है। (फोटो- NASA)

स्पेस स्टेशन में जीवनImage Credit : NASA06 / 07

स्पेस स्टेशन में जीवन

स्पेस स्टेशन में जीवन की स्थिति पृथ्वी से बहुत अलग होती है। यहां पर, एस्ट्रोनॉट्स को माइक्रोग्रैविटी के कारण स्थिर रहने में कठिनाई होती है। उन्हें अपने दैनिक कार्यों को संतुलित और व्यवस्थित तरीके से करना पड़ता है। इसके अलावा, उन्हें नियमित रूप से व्यायाम करना पड़ता है ताकि उनकी हड्डियां और मांसपेशियाँ मजबूत बनी रहें। (फोटो- NASA)

भविष्य की योजनाएंImage Credit : NASA07 / 07

भविष्य की योजनाएं

भविष्य में, स्पेस स्टेशन के स्थान पर चंद्रमा या मंगल पर स्थायी मानव बस्तियां स्थापित करने की योजनाएं बनाई जा रही हैं। इन योजनाओं में, स्थिरता और जीवन की सुरक्षा के लिए नए तकनीकी समाधानों की आवश्यकता होगी, क्योंकि माइक्रोग्रैविटी की स्थिति में जीवन जीना चुनौतीपूर्ण होता है। (फोटो- NASA)

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