एयरफोर्स वन हमेशा से दुनिया के सामने अमेरिका की ताकत का प्रतीक रहा है। पहले अमेरिकी वायुसेना के जिस विमान में राष्ट्रपति सफर करते थे, उसे ही एयरफोर्स वन कहा जाता था। यह एक कॉलसाइन होता है। हालांकि 20वीं सदी में राष्ट्रपति की सुरक्षा को देखते हुए बोइंग 747-200बी सीरीज के विमानों को खास सुविधाओं से लैस किया गया। इसमें सुरक्षा का व्यापक ध्यान रखा गया। एयरफोर्स वन विमान में पीछे की ओर 28000 और 29000 कोड लिखा होता है। इस विमान की सुरक्षा इसे सबसे ताकतवर विमान बनाती है। यह अत्याधुनिक संचार प्रणाली, मिसाइल सिस्टम से लैस है। यह 45 हजार फीट की ऊंचाई तक उड़ान भर सकता है।
यह विमान मिसाइल हमलों से बचाव के लिए उन्नत रक्षा प्रणालियों से लैस है। इसमें इलेक्ट्रॉनिक काउंटरमेज़र (ECM) लगे हैं जो दुश्मन के रडार और मिसाइलों को भ्रमित कर सकते हैं। इसमें अत्याधुनिक सैटेलाइट कम्युनिकेशन सिस्टम है, जिससे राष्ट्रपति दुनिया के किसी भी कोने से सुरक्षित रूप से बातचीत कर सकते हैं या आदेश जारी कर सकते हैं। विमान में एक मिनी अस्पताल है जिसमें ऑपरेशन थिएटर जैसी सुविधाएं मौजूद हैं और एक डॉक्टर हमेशा साथ रहता है।अंदरूनी हिस्सा बेहद शानदार हैस इसमें राष्ट्रपति का निजी कार्यालय, कॉन्फ्रेंस रूम, स्टाफ के लिए कार्यक्षेत्र, और प्रेस के लिए अलग सेक्शन है। इसलिए इसे उड़ता हुआ व्हाइट हाउस भी कहा जाता है।यह विमान हवा में ही ईंधन भर सकता है, जिससे यह बिना रुके बहुत लंबी दूरी तय कर सकता है।इसकी अधिकतम गति लगभग 1,000 किमी/घंटा है और यह लगभग 13,000 किलोमीटर तक उड़ान भर सकता है।इसका नीला-सफेद रंग संयोजन और United States of America लिखा रहता है, जिससे इसे तुरंत पहचाना जा सकता है।
एयर फोर्स वन की देखभाल किसी एक एजेंसी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरी तरह बहु-स्तरीय सुरक्षा और तकनीकी निगरानी का मामला है। इसकी सीधी जिम्मेदारी प्रेसिडेंशियल एयरलिफ्ट ग्रुप के पास होती है, जो सीधे व्हाइट हाउस मिलिट्री ऑफिस के अधीन काम करता है। विमान संचालन से लेकर सुरक्षा प्रोटोकॉल तक, हर कदम पर इसी ग्रुप की निगरानी रहती है। यूएस एयर फोर्स की विशेष यूनिट 89th Airlift Wing इसकी देखरेख करती है। यही, एयर फोर्स वन के लिए प्रशिक्षित पायलट, फ्लाइट क्रू और तकनीकी स्टाफ उपलब्ध कराती है। वहीं, बोइंग जिसने इस उड़ते किले को बनाया है वो इसे तकनीकी सपोर्ट देता है। हर उड़ान से पहले कई स्तर की जांच होती है।मेंटेनेंस स्टाफ को हाई-लेवल सुरक्षा क्लीयरेंस मिलता है। हालांकि ट्रंप प्रशासन अब मौजूदा विमानों को बदलकर उनकी जगह पर नए विमान लाना चाहता है। इसकी जिम्मेदारी भी बोइंग के ही पास है, लेकिन मौजूदा एयर फोर्स वन विमानों का संचालन, रखरखाव और सुरक्षा पूरी तरह अमेरिकी वायुसेना और व्हाइट हाउस के ही अधीन है।
दरअसल, मंगलवार शाम को अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने स्विटरलैंड के दावोस के लिए एयरफोर्स वन से उड़ान भरी थी, हालांकि रवाना होने के करीब एक घंटे बाद ही विमान ज्वाइंट बेस एंड्रयूज लौट आया। बाद में व्हाइट हाउस ने इसमें तकनीकी खराबी की सूचना दी। व्हाइट हाउस की प्रेस सेक्रेटरी कैरोलिन लेविट ने बताया कि रवाना होने के बाद मामूली इलेक्ट्रीक तकनीकी समस्या सामने आई। इसको देखते हुए सुरक्षा कारणों से ट्रंप को यूटर्न लेना पड़ा। विमान में सवार एक रिपोर्टर ने बताया कि टेकऑफ के बाद प्रेस केबिन की लाइटें कुछ देर के लिए बंद हो गई थीं, हालांकि उस समय कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया गया था। करीब एक घंटे बाद बताया गया कि विमान वापस लौट रहा है। राष्ट्रपति और उनकी टीम दूसरे विमान में सवार होकर स्विट्जरलैंड के लिए रवाना होगी।
जैसा कि व्हाइट हाउस की प्रेस सेक्रेटरी कैरोलिन लेविट ने बताया कि एयरफोर्स वन विमान में कोई बहुत बड़ी समस्या नहीं थी। उनके मुताबिक, ये मामूली इलेक्ट्रिक तकनीकी समस्या थी। वापस लौटने का फैसला टेकऑफ के तुरंत बाद लिया गया।
नहीं, एयरफोर्स वन विमानों में खतरे की गुंजाइश बेहद कम होती है। किसी भी खतरे की आशंका होने पर बैकअप विमान हमेशा तैयार रहता है। तकनीकी दिक्कत पर उड़ान तुरंत रद्द या बदली जाती है। इसके अलावा, इस विमान की संचार प्रणाली बहुत खास है। यह ऐसी है कि विमान कितनी भी ऊंचाई पर उड़ रहा हो राष्ट्रपति तुरंत सेना या व्हाइट हाउस से संपर्क कर सकते हैं। अब आगे क्या?अमेरिका नए VC-25B Air Force One पर काम कर रहा है, जिससे कि पुराने विमानों को बदला जा सके। सुरक्षा और भरोसेमंद बने और तकनीकी सीमाएं खत्म हों।