सोवियत संघ ने 19 अप्रैल 1971 को सैल्यूट 1 को लॉन्च किया, जो दुनिया का पहला स्पेस स्टेशन था। इसका उद्देश्य अंतरिक्ष में मानवों के रहने और काम करने के लिए स्थायी बेस तैयार करना था।
सैल्यूट 1 ने यह साबित किया कि अंतरिक्ष में लंबे समय तक रहना संभव है। इसके बाद के कई मिशन सैल्यूट स्टेशन से संचालित किए गए, जो अंतरिक्ष जीवन और विज्ञान के लिए नए अध्याय थे।
पहला मानव मिशन सोवियत कास्मोनॉट (अंतरिक्ष यात्री) होर्डेई इस्त्रोवस्की और व्लादिमीर सेरियोगोव ने सैल्यूट 1 पर भेजा गया, लेकिन उनका मिशन तकनीकी कारणों से थोड़ा मुश्किल रहा।
सैल्यूट 1 और उसके बाद के सोवियत स्पेस स्टेशन जैसे मिर ने अंतरराष्ट्रीय स्पेस स्टेशन (ISS) के लिए तकनीकी नींव रखी, जहां कई देशों के अंतरिक्ष यात्री मिलकर काम करते हैं।
सैल्यूट 1 की सफलता ने स्पेस स्टेशन डिजाइन और संचालन में कई तकनीकी क्रांतियां लाईं, जैसे लंबे समय तक जीवन समर्थन सिस्टम, वैज्ञानिक उपकरणों का उपयोग, और अंतरिक्ष में उपकरणों की मरम्मत।
सोवियत संघ की इस उपलब्धि ने अमेरिका को भी प्रेरित किया और उसने बाद में Skylab नामक अपना पहला स्पेस स्टेशन लॉन्च किया, लेकिन वह सैल्यूट 1 के बाद आया।
सोवियत संघ का सैल्यूट प्रोग्राम बाद में मिर स्पेस स्टेशन में विकसित हुआ, जो अंतरराष्ट्रीय सहयोग और मानव अंतरिक्ष अन्वेषण का प्रतीक बना, और आज के ISS की नींव है।