ओसामा बिन लादेन का जन्म 10 मार्च 1957 को सऊदी अरब के रियाद शहर में हुआ था। वह एक समृद्ध और प्रभावशाली परिवार में पैदा हुआ था। ओसामा का पालन-पोषण एक धार्मिक माहौल में हुआ, और उसने इस्लामिक शिक्षा प्राप्त की। 1980 के दशक में, जब सोवियत संघ ने अफगानिस्तान पर आक्रमण किया, ओसामा बिन लादेन ने अफगान मुजाहिदीन (जो सोवियत संघ के खिलाफ संघर्ष कर रहे थे) का समर्थन करने के लिए अफगानिस्तान जाना शुरू किया। ओसामा का उद्देश्य इस्लामी संघर्ष में हिस्सा लेना था। 1988 में लादेन ने अलकायदा की स्थापना की। बिन लादेन ने इस संगठन को एक वैश्विक इस्लामी जिहाद के रूप में स्थापित किया, जिसका उद्देश्य पश्चिमी देशों, विशेष रूप से अमेरिका और उनके सहयोगियों के खिलाफ संघर्ष करना था।
ओसामा बिन लादेन का नाम पूरी दुनिया में 11 सितंबर 2001 के आतंकी हमलों के बाद प्रमुखता से सामने आया। इस हमले में अलकायदा ने चार हवाई जहाजों का अपहरण किया। दो जहाजों ने न्यूयॉर्क शहर के वर्ल्ड ट्रेड सेंटर की जुड़वां इमारतों को टक्कर मारी, एक ने पेंटागन को निशाना बनाया, और चौथा विमान पेंसिलवेनिया में क्रैश हो गया। इस हमले में लगभग 3,000 लोग मारे गए। यह हमला अलकायदा द्वारा की गई सबसे बड़ी और घातक कार्यवाही थी, और इसके बाद ओसामा बिन लादेन को वैश्विक आतंकवाद का चेहरा माना जाने लगा।
11 सितंबर के हमले के बाद, अमेरिका ने ओसामा बिन लादेन और अलकायदा के खिलाफ युद्ध छेड़ने की घोषणा की। 2001 में, अमेरिका ने अफगानिस्तान पर हमला कर दिया, जहां तालिबान सरकार ने बिन लादेन और अलकायदा को शरण दी थी। तालिबान सरकार ने बिन लादेन को अमेरिका को सौंपने से इनकार कर दिया, जिसके बाद अमेरिका ने अफगानिस्तान में सैन्य अभियान शुरू किया।
ओसामा बिन लादेन के स्थान का पता लगाने के लिए शुरू में कुछ छोटे सुराग मिले। लेकिन ये काफी नहीं था। अमेरिका लादेन की तलाश में लगा रहा। 2010 में, अमेरिकी खुफिया एजेंसी CIA को एक नया सुराग मिला। एक अलकायदा के सदस्य के रिश्तेदार (जो बिन लादेन के साथ जुड़ा हुआ था) को पकड़ा गया और उससे पूछताछ की गई। उसने यह बताया कि वह शख्स, जो बिन लादेन के संपर्क में था, पाकिस्तान के एबटाबाद शहर में एक बड़े घर में रहता था। इस घर का निर्माण असामान्य था, क्योंकि यह शहर के बाकी हिस्सों से काफी अलग था और इसे बहुत सुरक्षित रूप से डिजाइन किया गया था। एबटाबाद में उस विशेष घर को लेकर CIA ने और अधिक खुफिया निगरानी शुरू की। जिसके बाद कंफर्म हुआ कि लादेन एबटाबाद में छिपा है।
2011 में अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा की मंजूरी से ऑपरेशन "नेप्च्यून स्पीयर" की योजना बनाई गई। यह ऑपरेशन अमेरिकी नौसेना के विशेष कमांडो बल, "नेली सील" (Navy SEALs) द्वारा किया गया। 2 मई 2011 को, अमेरिकी Navy SEALs ने एबटाबाद में उस घर पर छापा मारा, जहां ओसामा बिन लादेन छिपा हुआ था। ऑपरेशन पूरी तरह से गुप्त था, और SEALs ने बिन लादेन को मार डाला।
ओसामा बिन लादेन को पाकिस्तान में मारने के बाद अमेरिकी नेवी सील कमांडो ने उसकी लाश को वहां से उठाया और बीच समुद्र ले जाकर फेंक दिया। बिन लादेन की मौत के बाद, अमेरिकी अधिकारियों ने यह सुनिश्चित करना चाहा कि उसका कोई स्मारक या कब्र न बने, जिसे लोग श्रद्धांजलि देने के लिए इकट्ठा हो सकें। ओसामा बिन लादेन की लाश को समुद्र में दफन करने का निर्णय अमेरिकी अधिकारियों द्वारा कई रणनीतिक और राजनीतिक कारणों से लिया गया था। इस कदम से यह सुनिश्चित किया गया कि बिन लादेन के शव पर कोई श्रद्धांजलि स्थल या स्मारक न बने, और यह भी कि पाकिस्तान और अन्य देशों में विवाद पैदा करने से बचा जा सके। साथ ही, यह कदम उसकी पहचान को स्थायी रूप से मिटाने के उद्देश्य से उठाया गया था।
ओसामा बिन लादेन का ठिकाना पाकिस्तान के एबटाबाद शहर में मिला, जो पाकिस्तान के इस्लामाबाद से करीब 100 किलोमीटर दूर स्थित है। एबटाबाद एक सैन्य और शैक्षिक केंद्र के रूप में जाना जाता है, और यह पाकिस्तान के उच्च अधिकारियों के लिए एक सुरक्षित क्षेत्र था। बिन लादेन को एक बहुत ही सुरक्षित और उच्च सुरक्षा वाले घर में छिपाया गया था, जो कि बिन लादेन की स्थिति और पाकिस्तान की भूमिका के बारे में गंभीर सवाल उठाता है। कई पश्चिमी अधिकारियों ने यह माना कि पाकिस्तान ने बिन लादेन को छिपाने में सीधे या अप्रत्यक्ष रूप से मदद की थी।