वेनेजुएला की राजधानी काराकस में शुक्रवार देर रात स्थानीय समयानुसार करीब दो बजे कम ऊंचाई पर उड़ते विमानों की आवाज और कम से कम सात विस्फोटों की गूंज सुनाई दी। इस दौरान राजधानी के एक सैन्य अड्डे से धुआं उठता दिखाई दिया, जबकि एक अन्य सैन्य प्रतिष्ठान में बिजली गुल हो गई। अचानक हुई इन घटनाओं से घबराए लोग अपने घरों से बाहर निकलकर सड़कों पर आ गए। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार धमाकों से पूरी जमीन कांप उठी।
इस घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए वेनेजुएला सरकार ने अमेरिका पर कई राज्यों में सैन्य ठिकानों और प्रतिष्ठानों को निशाना बनाने का आरोप लगाया। सरकार की ओर से जारी बयान में इसे “साम्राज्यवादी हमला” करार दिया गया। वहीं, अमेरिकी रक्षा मंत्रालय पेंटागन ने इस पर टिप्पणी करने से बचते हुए व्हाइट हाउस का हवाला दिया, जबकि व्हाइट हाउस की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई। @CBSNews के व्हाइट हाउस जर्नलिस्ट ने कहा कि अमेरिकी अधिकारियों ने बताया कि राष्ट्रपति ट्रम्प ने वेनेजुएला के अंदर मिलिट्री ठिकानों सहित कई जगहों पर हमले का आदेश दिया है।
इस घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए वेनेजुएला सरकार ने अमेरिका पर कई राज्यों में सैन्य ठिकानों और प्रतिष्ठानों को निशाना बनाने का आरोप लगाया। सरकार की ओर से जारी बयान में इसे “साम्राज्यवादी हमला” करार दिया गया। वहीं, अमेरिकी रक्षा मंत्रालय पेंटागन ने इस पर टिप्पणी करने से बचते हुए व्हाइट हाउस का हवाला दिया, जबकि व्हाइट हाउस की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई। @CBSNews के व्हाइट हाउस जर्नलिस्ट ने कहा कि अमेरिकी अधिकारियों ने बताया कि राष्ट्रपति ट्रम्प ने वेनेजुएला के अंदर मिलिट्री ठिकानों सहित कई जगहों पर हमले का आदेश दिया है।
घटनाओं से पहले अमेरिकी संघीय विमानन प्राधिकरण (एफएए) ने “जारी सैन्य गतिविधि” का हवाला देते हुए वेनेजुएला के हवाई क्षेत्र में अमेरिकी वाणिज्यिक उड़ानों पर प्रतिबंध लगा दिया था। इसी बीच वेनेजुएला सरकार ने अपने समर्थकों से सड़कों पर उतरने का आह्वान किया और कहा कि देश की सभी सामाजिक और राजनीतिक ताकतें लामबंदी योजनाओं को सक्रिय करें। राष्ट्रपति निकोलस मादुरो ने सभी राष्ट्रीय रक्षा योजनाएं लागू करने के निर्देश देते हुए “बाह्य व्यवधान की स्थिति” घोषित कर दी।
वेनेजुएला और अमेरिका के बीच तनाव कई दशकों पुराना है, जिसकी जड़ें समाजवादी राजनीति और सत्ता के वैचारिक टकराव में हैं। ह्यूगो चावेज के शासनकाल से ही दोनों देशों के रिश्ते बिगड़ने लगे थे, जो निकोलस मादुरो के राष्ट्रपति बनने के बाद और अधिक खराब हो गए। अमेरिका मादुरो सरकार को अलोकतांत्रिक मानता है, जबकि वेनेजुएला इसे बाहरी हस्तक्षेप बताता है।
अमेरिका ने वेनेजुएला में चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए सरकार पर धांधली और विपक्ष को दबाने के आरोप लगाए हैं। 2019 में विपक्षी नेता जुआन गुएदो को अंतरिम राष्ट्रपति के रूप में मान्यता देना इसी विवाद का बड़ा मोड़ था। इसके बाद दोनों देशों के बीच राजनयिक संबंध लगभग ठप हो गए।
वेनेजुएला के विशाल तेल भंडार इस टकराव का अहम कारण हैं। अमेरिका ने मादुरो सरकार पर दबाव बनाने के लिए तेल और वित्तीय क्षेत्र पर कड़े प्रतिबंध लगाए। वेनेजुएला का कहना है कि इन प्रतिबंधों से उसकी अर्थव्यवस्था चरमरा गई और आम जनता सबसे ज्यादा प्रभावित हुई। इस विवाद में अंतरराष्ट्रीय राजनीति भी अहम भूमिका निभा रही है। रूस और चीन वेनेजुएला के समर्थन में हैं, जबकि अमेरिका और उसके सहयोगी विपक्ष के साथ खड़े हैं। हाल के समय में अमेरिका ने सीमित बातचीत और कुछ प्रतिबंधों में ढील दी है, लेकिन अविश्वास के कारण रिश्ते अब भी तनावपूर्ण बने हुए हैं।