समारोह में आमंत्रित अतिथियों का स्वागत पूर्वोत्तर भारत की पहचान माने जाने वाले विशेष रूप से डिजाइन किए गए एरी सिल्क स्टॉल से किया गया। एरी सिल्क को ‘पीस सिल्क’ के नाम से भी जाना जाता है, क्योंकि इसके निर्माण की प्रक्रिया में रेशम के कीड़ों को नुकसान नहीं पहुंचाया जाता। यह रेशम पूर्वोत्तर क्षेत्र की पारंपरिक बुनाई, सांस्कृतिक विरासत और स्थानीय अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
गणतंत्र दिवस समारोह के मुख्य अतिथि यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन भी इस अवसर पर उपस्थित रहीं। राष्ट्रपति भवन के अनुसार, उनकी मौजूदगी ने भारत और यूरोपीय संघ के बीच मित्रता और सहयोग के संबंधों को और मजबूती प्रदान की।
इस अवसर पर उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, पूर्व राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद, भारत के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्य कांत, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, केंद्रीय मंत्रिमंडल के सदस्य, राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे। इसके अलावा विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देने वाले प्रतिष्ठित नागरिकों और सरकार की विभिन्न विकास योजनाओं के लाभार्थियों ने भी समारोह की शोभा बढ़ाई।
इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने परिचित सादे लेकिन प्रभावशाली अंदाज में दिखे। कंधों पर रंगीन पारंपरिक स्टॉल के साथ उनका लुक भारतीयता और वैश्विक नेतृत्व दोनों का संतुलन दर्शाता रहा। वहीं, पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद भी शालीन पारंपरिक परिधान में नजर आए, जबकि उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने गरिमामय उपस्थिति दर्ज कराई। विदेश मंत्री एस. जयशंकर क्लासिक बंदगला और सनग्लासेस में एकदम डिप्लोमैटिक ग्रेस के साथ दिखे।
वहीं, कार्यक्रम में राहुल गांधी सफेद कुर्ता-पायजामा में सादगी के प्रतीक बने, जबकि मल्लिकार्जुन खरगे पारंपरिक परिधान में गंभीर और संयमित अंदाज में दिखे।
राष्ट्रपति भवन के अधिकारियों के अनुसार, अतिथियों ने पूर्वोत्तर राज्यों की जीवंत सांस्कृतिक प्रस्तुतियों, पारंपरिक कला रूपों और वहां के विशिष्ट व्यंजनों का आनंद लिया। इन प्रस्तुतियों के माध्यम से पूर्वोत्तर भारत की सांस्कृतिक विविधता, लोक परंपराओं और कलात्मक विरासत को राष्ट्रीय मंच पर प्रभावशाली ढंग से प्रदर्शित किया गया।