चीन ने इस परियोजना की शुरुआत 2021 में की थी, जब इसका मुख्य मॉड्यूल "तियानहे" (Tianhe) पृथ्वी की निचली कक्षा में स्थापित किया गया। इसके बाद Wentian और Mengtian नामक दो प्रयोगशाला मॉड्यूल भी जोड़ दिए गए, जिससे यह स्टेशन पूर्ण रूप से सक्रिय और कार्यशील हो गया। (फोटो- CNSpaceStation)
तियांगोंग को इस प्रकार डिज़ाइन किया गया है कि यह पृथ्वी से लगभग 340 से 450 किलोमीटर की ऊंचाई पर स्थित है और लगभग हर 90 मिनट में पृथ्वी का एक चक्कर पूरा करता है। इसमें एक बार में तीन अंतरिक्ष यात्री, जिन्हें चीन में "taikonauts" कहा जाता है, रह सकते हैं। अब तक कई मिशनों के माध्यम से चीन ने अंतरिक्ष में न केवल पुरुष बल्कि महिलाओं को भी भेजा है, जिनमें वांग यापिंग जैसी महिला अंतरिक्ष यात्री शामिल हैं जिन्होंने तियांगोंग से पहला चीनी महिला स्पेसवॉक भी किया। (फोटो- CNSpaceStation)
इस स्टेशन का उद्देश्य वैज्ञानिक अनुसंधान को बढ़ावा देना, पृथ्वी के वातावरण और जलवायु की निगरानी करना, माइक्रोग्रैविटी में जैविक और भौतिक प्रयोग करना तथा स्पेस मेडिसिन को विकसित करना है। इसमें उन्नत प्रयोगशालाएं और वैज्ञानिक उपकरण लगे हैं, जिससे चीन स्वतंत्र रूप से अंतरिक्ष अनुसंधान कर पा रहा है। चीन ने इस स्टेशन को पूरी तरह स्वदेशी तकनीक से बनाया है, और यह देश की तकनीकी आत्मनिर्भरता का एक शानदार उदाहरण है। (फोटो- CNSpaceStation)
तियांगोंग की एक विशेष बात यह है कि यह पूरी तरह से चीन द्वारा संचालित है। इसके संचालन में न तो NASA, ESA, JAXA और न ही रूस की Roscosmos जैसी कोई अंतरराष्ट्रीय एजेंसी शामिल है। यह चीन का पूरी तरह स्वतंत्र प्रयास है, जो उसे अन्य देशों पर निर्भरता से मुक्त करता है। हालांकि चीन ने यह संकेत जरूर दिया है कि भविष्य में वह कुछ सीमित अंतरराष्ट्रीय सहयोग के लिए अपने स्टेशन के दरवाजे खोल सकता है। संयुक्त राष्ट्र के साथ मिलकर चीन ने कुछ विकासशील देशों के छोटे वैज्ञानिक उपकरणों को भी इस स्टेशन पर ले जाने की अनुमति दी है। (फोटो- CNSpaceStation)
यदि तुलना की जाए तो अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) के मुकाबले तियांगोंग छोटा है, परंतु आधुनिक, कॉम्पैक्ट और कुशल है। जबकि ISS में विभिन्न देशों के अंतरिक्ष यात्री रहते हैं और प्रयोगशालाएं संयुक्त प्रयासों से चलती हैं, वहीं तियांगोंग चीन की एकल-देशीय महत्वाकांक्षा का प्रमाण है। ISS के विपरीत यह बहुत कम लागत में तैयार हुआ है और इसके रख-रखाव व संचालन पर नियंत्रण पूरी तरह चीन के हाथों में है। (फोटो- CNSpaceStation)
भविष्य में चीन इस स्टेशन से "शुनतियन" (Xuntian) नामक एक अंतरिक्ष दूरबीन भी कक्षा में तैनात करने जा रहा है, जो हबल स्पेस टेलीस्कोप की तरह ही शक्तिशाली होगी और तियांगोंग के पास ही तैनात रहेगी। यह स्टेशन अगले 10 से 15 वर्षों तक कार्यशील रहेगा और संभव है कि यह भविष्य के मानव मिशनों का केंद्र भी बने। (फोटो- CNSpaceStation)
Tiangong ~340–450 किलोमीटर की ऊंचाई पर, Low Earth Orbit (LEO) में है, जो लगभग ISS जितनी ही है। इसका झुकाव (Inclination) ~41.5° है, जिससे यह अधिकतर एशियाई, अफ्रीकी और यूरोपीय देशों के ऊपर से गुजरता है। (फोटो- CNSpaceStation)