इस एक्सप्रेसवे से खड़गपुर और विशाखापत्तनम के बीच यात्रा का समय 14 घंटे से घटकर सिर्फ 8 घंटे रह जाएगा। यह यात्री और माल ढुलाई दोनों के लिए एक बड़ा बदलाव साबित होने जा रहा है।
यह एक्सप्रेसवे पश्चिम बंगाल के खड़गपुर को आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम से जोड़ेगा। यह सड़क ओडिशा के प्रमुख शहरों और कस्बों से होकर गुज़रेगी, जिसमें चंदीखोल, कटक, खोरदा, तांगी और ब्रह्मपुर शामिल हैं। यह गलियारा देश के पूर्वी हिस्से में प्रमुख आर्थिक केंद्रों के बीच संपर्क में भी सुधार करेगा।
सरकार इस एक्सप्रेसवे से आर्थिक फायदा होगा। इसके दूरगामी आर्थिक असर पड़ेंगे क्योंकि इससे माल की ढुलाई तेजी और आसानी से होगी जिससे व्यापार और औद्योगिक विकास तेजी से बढ़ेगा। एक्सप्रेसवे से कम विकसित क्षेत्रों के लिए आर्थिक अवसर लाएगा, क्षेत्रीय विकास को बढ़ावा मिलेगा और रोजगार पैदा होंगे।
सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) ने एक्सप्रेसवे के लिए पहले ही तैयारियां शुरू कर दी हैं। विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) के लिए तकनीकी बोलियां नवंबर 2024 में खोली गई थीं और काफी बोलियां भी मिली हैं।
मूल्यांकन के बाद जल्द वित्तीय बोलियां भी आने की उम्मीद है। अगर अनुबंध 2025 के मध्य तक दिए जाते हैं, तो डीपीआर को 2026 के अंत तक अंतिम रूप दिया जा सकता है। निर्माण कार्य 2028 में शुरू होने का अनुमान है।
पूरा होने पर खड़गपुर-विशाखापत्तनम एक्सप्रेसवे एक गेम चेंजर रूट साबित होगा। इसके कुशल डिजाइन से यात्रा के समय में कमी आएगी और क्षेत्रीय संपर्क को भी बढ़ावा मिलेगा। यह देश की आर्थिक वृद्धि में भी योगदान देगा।
बेहतर योजना और रिसर्च के साथ यह एक्सप्रेसवे तीन प्रमुख राज्यों, पश्चिम बंगाल, ओडिशा और आंध्र प्रदेश में लाखों लोगों को फायदा पहुंचाएगा, जो इसे पूर्वी भारत की तरक्की में एक प्रमुख मील का पत्थर बनाएगा।