अमृतसर-जामनगर एक्सप्रेसवे देश के चार सबसे बड़े राज्यों को एक साथ जोड़ेगा। इस एक्सप्रेसवे के जरिए राजस्थान, पंजाब, हरियाणा और गुजरात की सीधी कनेक्टिविटी होंगी। इस एक्सप्रेसवे की लंबाई करीबन 917 किलोमीटर है। इसे 2025 के अंत तक तैयार करने का लक्ष्य है।
इस एक्सप्रेसवे के बनने के बाद 26 घंटे का सफर आधे समय में पूरा हो जाएगा। यानी की मात्रा 13 घंटे में लोग सीधे अपनी मंजिल तक पहुंच पाएंगे। लोगों का समय तो बचेगा ही, तेल-गैस का भी खर्च भी बचेगा। एनएचआईए 1224 किलोमीटर इस एक्सेस कंट्रोल ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे को चार से 6 लेन में तैयार कर रहा है।
इस एक्सप्रेसवे का एक बड़ा हिस्सा हरियाणा और राजस्थान में रेगिस्तान के बीच से गुजरेगा। इस एक्सप्रेसवे का इस्तेमाल आम लोगों की बजाय यहां के उद्योगों और व्यापारियों को होगा। इस एक्सप्रेसवे के बन जाने से अमृतसर और उसके आसपास के उद्योंगों की पहुंच सीधे गुजरात के उद्योगों तक हो जाएगी। इस एक्सप्रेसवे का करीब 500 किमी हिस्सा राजस्थान से गुजरेगा, जो रेगिस्तान में रेत के टीलों के बीच से होकर जाएगा।
अमृतसर-जामनगर एक्सप्रेसवे बन जाने से न सिर्फ यह दूरी 216 किमी कम हो जाएगी, बल्कि दोनों शहरों के बीच लगने वाला समय भी 13 घंटे कम हो जाएगा। यानी नए एक्सप्रेसवे के बन जाने पर अमृतसर से जामनगर पहुंचने में सिर्फ 13 घंटे लगेंगे। एक्सप्रेसवे पर गाड़ियां 100 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से फर्राटा भरेंगी, जिससे दोनों शहर नजदीक आ जाएंगे।
इस एक्सप्रेसवे बन जाने पर गुजरात से कश्मीर पहुंचना आसान हो जाएगा। एक्सप्रेसवे का लाभ अमृतसर, बठिंडा, मोगा, हनुमानगढ़, सूरतगढ़, बीकानेर, नागौर, जोधपुर, बाड़मेर और जामनगर के लोगों को भी होगा और यह सब एक तेज रफ्तार एक्सप्रेसवे से जुड़ जाएंगे।
अमृतसर-जामनगर एक्सप्रेसवे बनने से पंजाब, हरियाणा, जम्मू-कश्मीर और हिमाचल प्रदेश के लोगों को भी फायदा होगा।
अमृतसर-जामनगर एक्सप्रेसवे का फायदा दिल्ली-NCR के लोगों को भी होगा। यह एक्सप्रेसवे पंजाब, दिल्ली, राजस्थान, हरियाणा और गुजरात के लोगों को बेहतर कनेक्टिविटी देगा। इस एक्सप्रेसवे को दिल्ली-अमृतसर-कटरा एक्सप्रेसवे जोड़ा जाएगा।