कुल 700 किमी लंबा गोरखपुर-शामली एक्सप्रेसवे उत्तर प्रदेश के 22 जिलों से गुजरेगा और पूर्वी उत्तर प्रदेश को पश्चिमी उत्तर प्रदेश से जोड़ेगा। कुल 22 जिलों की 37 तहसीलें इससे जुडेंगी।
गोरखपुर-शामली एक्सप्रेसवे के बनने से न सिर्फ उत्तर प्रदेश बल्कि हरियाणा, पंजाब और दिल्ली को भी बेहतर कनेक्टिविटी मिलेगी। यह एक्सप्रेसवे संतकबीरनगर, सिद्धार्थनगर, बलरामपुर, बहराइच, लखनऊ, सीतापुर, शाहजहांपुर, हरदोई, बदायूं, रामपुर, मुरादाबाद, बरेली, संभल, बिजनौर, अमरोहा, मेरठ, सहारनपुर, मुजफ्फरनगर और शामली को जोड़ेगा।
गोरखपुर शामली एक्सप्रेसवे का निर्माण लगभग 35 हजार करोड़ में होगा और इसमें केंद्र सरकार भी यूपी सरकार को मदद करेगी। इस एक्सप्रेसवे के बन जाने के बाद शामली से गोरखपुर पहुंचने में लगभग 8 घंटे का समय लगेगा, जबकि अभी लगभग 15 घंटे लगते हैं।
गोरखपुर शामली एक्सप्रेसवे को आपातकालीन एक्सप्रेसवे के तौर पर विकसित किया जाएगा। इस पर हवाई पट्टी भी बनाई जाएगी, ताकि आपात स्थिति में यहां पर हवाई जहाज भी उतारे जा सकें।
गोरखपुर शामली एक्सप्रेसवे को ग्रीन कॉरिडोर के रूप में विकसित किया जाएगा। इसके दोनों ओर हजारों पेड़ और झाड़ियां लगाई जाएंगी।
गोरखपुर शामली एक्सप्रेसवे के निर्माण के दौरान हजारों मजदूरों को रोजगार मिलेगा। इस एक्सप्रेसवे के किनारे कई शहरों में औद्योगिक परियोजनाएं स्थापित होंगी, जहां रोजगार के अवसर पैदा होंगे।
गोरखपुर शामली एक्सप्रेसवे आगे गंगा एक्सप्रेसवे से जुड़ेगा। शामली में यह अंबाला एक्सप्रेसवे से जुड़ेगा, जिससे यूपी और पंजाब के बीच बेहतर रोड कनेक्टिविटी होगी।बता दें कि अंबाला एक्सप्रेसवे नॉर्थ-ईस्ट कॉरिडोर का हिस्सा है।