गणतंत्र दिवस 2022 के अवसर पर प्रधानमंत्री मोदी ने उत्तराखंड की पारंपरिक क्षेत्रीय टोपी पहनी थी। उन्होंने इसे ग्रे जैकेट और ब्रह्म कमल के ब्रोच के साथ पहना था। ब्रह्म कमल कठोर पर्वतीय परिस्थितियों में भी मजबूती और सहनशक्ति का प्रतीक माना जाता है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साल 2025 में गणतंत्र दिवस पर चमकीली केसरिया पगड़ी पहनी थी। यह “स्वर्णिम भारत” की थीम के साथ बेहद खूबसूरती से मेल खाती थी। केसरिया रंग भारत की आध्यात्मिक संस्कृति में गहराई से रचा-बसा है और इसका राजनीति से भी गहरा संबंध रहा है।
2024 की गणतंत्र दिवस परेड के दौरान पीएम मोदी ने पीले, केसरिया, गुलाबी और सफेद रंगों वाला बहुरंगी बंधनी साफा पहना था। जो लोग नहीं जानते, उनके लिए बता दें कि बंधनी भारत की सबसे प्राचीन टाई-डाई तकनीकों में से एक है, जिसका व्यापक रूप से गुजरात और राजस्थान में प्रचलन है।
2023 में पीएम मोदी ने पीले, हरे, नारंगी और लाल रंगों के शेड्स वाला एक चमकदार फेटा पहना था। ये रंग न सिर्फ भारत की विविधता को दर्शाते हैं, बल्कि सशस्त्र बलों से जुड़े रेजिमेंटल रंगों का भी प्रतीक माने जाते हैं।
गणतंत्र दिवस 2022 के अवसर पर प्रधानमंत्री मोदी ने उत्तराखंड की पारंपरिक क्षेत्रीय टोपी पहनी थी। उन्होंने इसे ग्रे जैकेट और ब्रह्म कमल के ब्रोच के साथ पहना था। ब्रह्म कमल कठोर पर्वतीय परिस्थितियों में भी मजबूती और सहनशक्ति का प्रतीक माना जाता है।
2021 में प्रधानमंत्री मोदी ने लाल रंग की हलारी पगड़ी पहनी थी, जिस पर चमकीले पीले रंग के बिंदु बने हुए थे। यह पगड़ी जामनगर के राजपरिवार की ओर से उन्हें भेंट की गई थी, जिससे इसमें ऐतिहासिक निरंतरता का भाव भी जुड़ गया।
2020 में प्रधानमंत्री मोदी को केसरिया रंग की बांधेज पगड़ी पहने देखा गया था, जिसमें लंबा लटकता हुआ पल्ला खास आकर्षण का केंद्र था।