नीना गुप्ता की पेरेंटिंग भले पारंपरिक ढांचे से बाहर है लेकिन उतनी ही प्रभावशाली और सशक्त भी है। नीना सिखाती हैं कि सिंगल पैरेंट होकर भी बच्चे को आत्मनिर्भर, संवेदनशील और आत्मविश्वासी बनाया जा सकता है। बशर्ते पेरेंटिंग में ईमानदारी हो। आइए सीखते हैं नीना गुप्ता से पेरेंटिंग के गुण:
नीना गुप्ता ने बिना शादी के बेटी मसाबा गुप्ता को जन्म दिया। यह उस दौर में बिल्कुल आसान ना था। उन्होंने समाज की चिंता किए बिना अपने फैसले को अपनाया और उसकी जिम्मेदारी ली।
नीना ने बेटी के साथ हमेशा खुला संवाद रखा। उन्होंने हमेशा मसाबा को हर मुद्दे पर खुलकर सोचने और बात करने की आज़ादी दी। यहा स्वस्थ पेरेंटिंग की सबसे मजबूत नींव है।
नीना ने मसाबा को संघर्षों से भागने नहीं, बल्कि उनका सामना करना सिखाया। जीवन में कठिनाइयों के बावजूद उन्होंने कभी अपने आत्मसम्मान से समझौता नहीं किया।
नीना ने कभी अपनी बेटी पर अपनी इच्छाएं नहीं थोपीं। मसाबा ने जब फैशन डिजाइनिंग को करियर बनाया, तो नीना ने उसे पूरी आज़ादी और समर्थन दिया।
नीना खुद मेहनती, ईमानदार और आत्मनिर्भर हैं। उन्होंने अपनी बेटी को भी यही मूल्य दिए। एक मां की सबसे बड़ी सीख होती है उसका अपना आचरण।