नेपाल में होली धूमधाम से मनाई जाती है। वहां रंगों का यह त्योहार फाल्गुन पूर्णिमा पर मनाया जाता है
नेपाल के पहाड़ी इलाकों में भारत से एक दिन पहले और तराई बेल्ट में उसी दिन होली का त्योहार मनता है।
वहां होली की शुरुआत चिर स्वयेगू से होती है। काठमांडू में होली के हफ्ताभर पहले चीर (बांस का खंभा) गाड़कर उत्सव की आधिकारिक शुरुआत होती है। इस साल आज 24 फरवरी से होली की शुरुआत हो गई है।
इस चिर कोहोली की शाम जला दिया जाता है। काठमांडू के दरबार स्क्वायर पर रंगीन कपड़ों से सजे चिर जलाकर बुराई पर अच्छाई की जीत मनाई जाती है।
नेपाल में होली की मस्ती लगभग भारत के ही स्तर की होती है। वहां सूखें रंगों के साथ ही लोग पानी से भरे गुब्बारों से होली खेलते हैं। इन्हीं गुब्बारों को स्थानीय भाषा में लोला कहा जाता है।
नेपाल में होली सामूहिकता का पर्व है। लोग गली मोहल्ले और नुक्कड़ों पर इकट्ठा होते हैं। नाचते गाते हैं। एक दूसरे को रंग लगाते हुए होली की बधाई देते हैं।
नेपाल में होली का उत्सव वहां की पारंपरिक मिठाइयों के बिना अधूरा रहता है। इसकी तैयारी कई दिन पहले से शुरू हो जाती है। दक्षिणी नेपाल में होली पर भारत की ही तरह गुझिया खाने का चलन है।