चाणक्य ने बताया था कि हर परिस्थिति में मित्र का अर्थ बदल सकता है। जैसे विदेश में रहने वाले के लिए ज्ञान ही सबसे बड़ा मित्र होता है, घर में परिवार और पत्नी मित्र की भूमिका निभाते हैं, और बीमारी में दवा ही सच्चा सहारा बनती है। इससे यह समझ आता है कि जीवन में अलग-अलग समय पर अलग चीजें हमारे सच्चे साथी बनती हैं।
चाणक्य के अनुसार, जो व्यक्ति बीमारी, दुख, संकट, दुश्मनों के डर या कठिन परिस्थितियों में आपका साथ नहीं छोड़ता, वही असली मित्र होता है।
अच्छे समय में तो हर कोई साथ देता है, लेकिन बुरे वक्त में जो कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा रहता है, वही सच्ची दोस्ती निभाता है।
चाणक्य नीति के श्लोक में बताया गया है कि जो व्यक्ति कठिन काम, संकट और यहां तक कि मृत्यु के बाद भी श्मशान तक साथ जाए, वही सच्चा बंधु या मित्र कहलाने योग्य है।
जो पीठ पीछे काम बिगाड़े और सामने से प्रिय बोले, ऐसे मित्र का त्याग कर देने में ही भलाई है, वरना आगे चलकर आपको काफी नुकसान झेलना पड़ सकता है।
चाणक्य के अनुसार, हर मुस्कुराने वाला व्यक्ति सच्चा मित्र नहीं होता। जो सामने तारीफ करे और पीछे बुराई, वह मित्र नहीं बल्कि छुपा हुआ दुश्मन होता है। ऐसे लोगों से सावधान रहना चाहिए और उन पर आंख बंद करके भरोसा नहीं करना चाहिए।
भले ही आपका कोई कितना भी खास क्यों न हो, फिर भी मित्र पर भी अधिक विश्वास करके उसे अपनी गुप्त बातें नहीं बतानी चाहिए। क्योंकि अगर कभी दोस्ती खराब हो जाए, तो वह आपकी गुप्त बातें सभी को बता सकता है।