बीके शिवानी के अनुसार पेरेंटिंग सिर्फ बच्चों को बड़ा करना नहीं, बल्कि उनके मन, भावनाओं और व्यक्तित्व को सही दिशा देना है। उन्होंने कुछ पेरेंटिंग टिप्स बताए हैं:
अकसर माता-पिता आदेश देते हैं, डांटते हैं या तुलना करते हैं। इससे बच्चे डर तो जाते हैं, लेकिन भीतर से दूर हो जाते हैं। पेरेंट्स को इन सबसे बचना चाहिए
बीके शिवानी सलाह देती हैं कि बच्चों से दोस्त की तरह बात करें। उनकी बातों को बीच में काटने के बजाय ध्यान से सुनें। जब बच्चा सुना हुआ महसूस करता है, तभी वह खुलकर अपनी भावनाएं साझा करता है।
पेरेंटिंग में तू आलसी है या तुझसे नहीं हो पाएगा जैसे शब्दों से बचें। क्योंकि फिर यही बच्चे का स्वभाव बन जाते हैं।
बीके शिवानी कहती हैं कि हर शब्द ऊर्जा है। अगर हम बच्चे को बार-बार नकारात्मक पहचान देंगे, तो वह वैसा ही बन जाएगा। इसके बजाय उसके प्रयास की सराहना करें, न कि सिर्फ रिजल्ट की।
प्यार को मार्क्स, व्यवहार या उपलब्धियों से जोड़ना गलत है। जब बच्चा यह जानता है कि मेरे माता-पिता मुझे हर हाल में स्वीकार करते हैं, तभी उसमें आत्मविश्वास पैदा होता है।
अगर हम चाहते हैं कि बच्चा एक आदर्श जीवन बिताए तो पहले आपको खुद वैसा बनना होगा जैसा आप बच्चे से उम्मीद करते हैं। बच्चे सुनने से ज्यादा देखकर सीखते हैं।