प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश को वैश्विक संकट से बचाने के लिए हाल ही में कई बातों को लेकर अपील की थी, जिसमें से एक 'वर्क फ्रॉम होम' भी है, लेकिन क्या आप वर्क फ्रॉम होम का सही मतलब जानते हैं, अगर नहीं, तो यहां जानें मोदी और योगी क्यों वर्क फ्रॉम होम पर जोर दे रहे हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील के बाद उत्तर प्रदेश सरकार अब ऊर्जा बचत और संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल को लेकर बड़े कदम उठाने की तैयारी में है। इसी के तहत, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वैश्विक परिस्थितियों, बढ़ते ट्रैफिक और ईंधन की खपत को देखते हुए अधिकारियों को नई कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए हैं। जल्द ही बड़े औद्योगिक संस्थानों, आईटी कंपनियों और स्टार्टअप्स में सप्ताह में दो दिन वर्क फ्रॉम होम लागू करने के लिए एडवाइजरी जारी की जा सकती है। साथ ही कार पूलिंग, पब्लिक ट्रांसपोर्ट और वर्चुअल मीटिंग्स को भी बढ़ावा देने पर जोर दिया जाएगा।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मुख्य सचिव, डीजीपी और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ हुई उच्चस्तरीय बैठक में कहा कि बदलते वैश्विक हालात को देखते हुए उत्तर प्रदेश को पहले से तैयार रहना होगा। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील को प्रदेश स्तर पर प्रभावी ढंग से लागू करने की बात कही।
सरकार की योजना के मुताबिक, जिन संस्थानों में कर्मचारियों की संख्या अधिक है, वहां सप्ताह में दो दिन वर्क फ्रॉम होम व्यवस्था लागू करने की सिफारिश की जाएगी। माना जा रहा है कि इससे ट्रैफिक जाम कम होगा, ईंधन की बचत होगी और प्रदूषण पर भी नियंत्रण पाने में मदद मिलेगी। इसके अलावा कर्मचारियों को भी राहत मिलेगी और कामकाज अधिक व्यवस्थित तरीके से हो सकेगा।
सीएम योगी ने कहा कि बदलाव की शुरुआत सरकार और जनप्रतिनिधियों से होनी चाहिए। उन्होंने मंत्रियों, सांसदों और विधायकों से सप्ताह में कम से कम एक दिन सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करने की अपील की। इसके साथ ही “नो व्हीकल डे” मनाने का सुझाव भी दिया गया है, ताकि लोगों में जागरूकता बढ़ाई जा सके।
मुख्यमंत्री ने सरकारी काफिलों में भी कटौती के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री और मंत्रियों के काफिलों में तत्काल 50 प्रतिशत तक वाहन कम किए जाएं और अनावश्यक वाहनों को हटाया जाए। सरकार का मानना है कि इससे ईंधन की बचत के साथ जनता के बीच सकारात्मक संदेश जाएगा। इसके अलावा राज्य सचिवालय और निदेशालय की करीब 50 प्रतिशत आंतरिक बैठकें वर्चुअल मोड में की जाएं। शिक्षा विभाग को भी स्कूल और कॉलेज स्तर की बैठकों और सेमिनार को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर आयोजित करने के निर्देश दिए गए हैं।
ज्यादातर लोग आसान भाषा में समझते हैं वर्क फ्रॉम होम का मतलब घर के आरामदायक माहौल में रहकर काम करना है, लेकिन बात इतने में खत्म नहीं होती है। वास्तव में वर्क फ्रॉम होम एक सुविधा है, जिसका गलत फायदा नहीं उठाना चाहिए। इस दौरान टास्क को गंभीरता से लेने की जरूरत है, ताकि आपका काम, कंपनी का काम प्रभावित न होने पाए।वर्क फ्रॉम होम में आपके प्रदर्शन में कमी न आए, इसे ध्यान में रखने की जरूरत होती है।WFH एक ऐसी कार्य व्यवस्था है, जहां कर्मचारी दफ्तर जाए बिना इंटरनेट और लैपटॉप के जरिए अपनी जिम्मेदारियां पूरी करता है, इस दौरान आपका बॉस आपको सीधे नहीं देखता, लेकिन आपको अपने बॉस को अपने दिमाग में रखने की जरूरत है।WFH में आने-जाने के समय और खर्च की बचत होती है। देखा जाए तो ऐसे में प्रोडक्विटी को भी बढ़ावा दिया जा सकता है, इससे न सिर्फ कंपनी बल्कि एम्प्लॉय को भी फायदा हो सकता है।