भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) कानपुर में कार्यरत 581 शिक्षकों में से अनुसूचित जाति (एससी), अनुसूचित जनजाति (एसटी) और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) से 76 शिक्षक कार्यरत हैं। सूचना के अधिकार कानून के तहत आईआईटी-कानपुर ने यह सूचना उपलब्ध कराई है। इस सूचना के मुताबिक, आईआईटी (बीएचयू), वाराणसी में कार्यरत 374 शिक्षकों में से 82 शिक्षक, एससी, एसटी और ओबीसी श्रेणी से आते हैं। इस तरह से, इन तीन समुदायों की आईआईटी-कानपुर में कार्यरत शिक्षकों में हिस्सेदारी 13.1 प्रतिशत, जबकि आईआईटी-बीएचयू में 21.9 प्रतिशत है।
’पीटीआई-भाषा’ द्वारा बृहस्पतिवार को जब आईआईटी-कानपुर के अधिकारियों से संपर्क किया गया तो उन्होंने कहा कि यह सूचना "अनिश्चित" है, जबकि आईआईटी-बीएचयू ने इन आंकड़ों की पुष्टि की। हालांकि, दोनों प्रमुख संस्थानों ने कहा कि वे बाद में विस्तृत जानकारी साझा करने में समर्थ होंगे।आईआईटी-कानपुर में वर्गवार आंकड़ों से पता चलता है कि 25 शिक्षक अनुसूचित जाति से, पांच अनुसूचित जनजाति से और 46 शिक्षक अन्य पिछड़ा वर्ग से हैं। प्रोफेसर के स्तर पर इनका प्रतिनिधित्व कम है। इस संस्थान के 257 प्रोफेसर में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति में से एक भी शामिल नहीं है और केवल तीन प्रोफेसर अन्य पिछड़ा वर्ग से हैं। शेष 254 अनारक्षित वर्ग से हैं।
वहीं, 128 एसोसिएट प्रोफेसर में आठ एससी, एक एसटी और सात ओबीसी वर्ग से हैं, जबकि 193 सहायक प्रोफेसर में 17 एससी, चार एसटी और 36 ओबीसी वर्ग से हैं। आईआईटी-बीएचयू में सभी तीन अकादमिक रैंक में 374 पदों में से 30 शिक्षक एससी, पांच एसटी और 47 ओबीसी वर्ग से हैं। वहीं, 129 प्रोफेसर में 11 एससी, एक एसटी और दो ओबीसी वर्ग से हैं, जबकि 113 अनारक्षित वर्ग से हैं। दो प्रोफेसर दिव्यांग वर्ग से भी हैं।
वहीं, 88 एसोसिएट प्रोफेसर में से सात ओबीसी और चार एससी वर्ग से हैं, जबकि एसटी वर्ग से एक भी शिक्षक नहीं है। इसी तरह, 158 सहायक प्रोफेसर में से 15 एससी, चार एसटी और 38 ओबीसी हैं।
यह सूचना हैदराबाद निवासी गौड किरन कुमार के आरटीआई आवेदन के जवाब में उपलब्ध कराई गई। आईआईटी-कानपुर ने छह फरवरी को, जबकि आईआईटी-बीएचयू ने 24 फरवरी को अपने जवाब दिए।
