जैसा की हमने बताया कि भारत के हर राज्य की अपनी एक अलग पहचान होती है। उसी प्रकार से देश का एक राज्य है, जिसे वहां कि नदियों के लिए जाना जाता है। जी हां, एक राज्य ऐसा है, जिसे पांच नदियों की भूमि कहा जाता है।
भारत के इतिहास और भूगोल में अपनी भौगोलिक विशेषता के कारण पांच नदियों की भूमि के नाम से 'पंजाब राज्य' को जाना जाता है।
'पंजाब' शब्द की उत्पत्ति फारसी भाषा के दो शब्दों से मिलकर हुई है। यहा 'पंज' का अर्थ होता है 'पांच' और 'आब' का अर्थ होता है 'पानी' या 'नदी'। इस प्रकार, पंजाब का सीधा सा शाब्दिक अर्थ है—"पांच नदियों की भूमि"।
प्राचीन काल में ऋग्वेद में इस क्षेत्र को 'सप्त सिंधु' (सात नदियों की भूमि) भी कहा जाता था, लेकिन समय के साथ इसका नाम पंजाब के रूप में प्रसिद्ध हुआ।
पंजाब की इस पवित्र और उपजाऊ मिट्टी को सींचने वाली पांच प्रमुख नदियां सतलुज, ब्यास, रावी , चेनाब और जेलम है।
पंजाब को पांच नदियों की भूमि के साथ भारत का 'अन्नदाता' भी कहा जाता है। क्योंकि यहां देश के कुल उत्पादन का करीब 60 प्रतिशत गेहूं उगाया जाता है। चावल की बात करें तो यहां देश के कुल उत्पादन का 45 प्रतिशत हिस्सा उगाया जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इसका नाम पंजाब क्यों पड़ा
साल 1947 में जब भारत और पाकिस्तान का विभाजन हुआ, तब पंजाब भी दो हिस्सों में बंट गया—पूर्वी पंजाब (जो भारत का हिस्सा बना) और पश्चिमी पंजाब (जो पाकिस्तान में चला गया)। इस बंटवारे के बाद चेनाब और झेलम नदियां पूरी तरह से पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में चली गई। वर्तमान भारतीय पंजाब में मुख्य रूप से सतलुज, ब्यास और रावी नदियां बहती हैं।