जब इरादे फौलादी हों और सीने में कुछ कर गुजरने का जुनून हो, तो दुनिया की कोई भी चुनौती आपका रास्ता नहीं रोक सकती। इस बात को सच साबित कर दिखाया है साल 2017 बैच की जांबाज आईपीएस (IPS) अधिकारी तनुश्री ने। हाल ही में केंद्र सरकार ने उनका तबादला जम्मू-कश्मीर से देश की राजधानी दिल्ली किया है। इस बदलाव के साथ ही तनुश्री के संघर्ष, उनकी सूझबूझ और देश सेवा के प्रति उनके समर्पण की कहानी एक बार फिर देश के लाखों युवाओं और यूपीएससी (UPSC) एस्पिरेंट्स की रगों में जोश भर रही है।
मिरांडा हाउस से CRPF का सफर
मूल रूप से बिहार की रहने वाली तनुश्री बचपन से ही मेधावी छात्रा थीं। उन्होंने देश के प्रतिष्ठित दिल्ली विश्वविद्यालय के मिरांडा हाउस कॉलेज से इतिहास में ग्रेजुएशन किया। कॉलेज की पढ़ाई के दौरान ही उनके मन में देश सेवा का अंकुर फूट चुका था। अपनी इसी जिद के दम पर साल 2014 में उन्होंने केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) में असिस्टेंट कमांडेंट के रूप में अपनी सेवा शुरू की। वर्दी तो मिल गई थी और देश की सेवा भी जारी थी, लेकिन तनुश्री की आंखों में पल रहा सबसे बड़ा सपना अभी हकीकत बनना बाकी था।
नौकरी के साथ कड़ा संघर्ष: जब जुनून ने थकने से मना कर दिया
एक अर्धसैनिक बल (Paramilitary Force) में अधिकारी रहते हुए देश की सुरक्षा की जिम्मेदारी निभाना और साथ में दुनिया की सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक सिविल सेवा (UPSC) की तैयारी करना, आसान नहीं था। ड्यूटी के कड़े प्रोटोकॉल, शारीरिक थकान और मानसिक दबाव के बीच भी तनुश्री ने अपनी किताबों से नाता नहीं तोड़ा। उन्होंने समय चुराया, रातों की नींद को अपनी तैयारी का हथियार बनाया और आखिरकार साल 2016 की सिविल सेवा परीक्षा में 652वीं रैंक हासिल कर अपने उस सबसे बड़े सपने को सच कर दिखाया। वे बन गईं आईपीएस तनुश्री।
प्रधानमंत्री मोदी के सामने वो 'ऐतिहासिक' जवाब
तनुश्री की सूझबूझ और हाजिरजवाबी का एक किस्सा आज भी सिविल सेवा के गलियारों में बड़े गर्व से सुनाया जाता है। ट्रेनिंग के दौरान उनकी मुलाकात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से हुई। प्रधानमंत्री ने उनसे एक दिलचस्प सवाल पूछा:
क्या टेक्सटाइल डिजाइनिंग और आतंकवाद से निपटने में कोई समानता हो सकती है?
इस टेढ़े सवाल पर तनुश्री ने जो जवाब दिया, उसने देश के प्रधानमंत्री का दिल जीत लिया। उन्होंने बेहद सादगी और गहराई से कहा:
जैसे अलग-अलग धागों को एक-एक करके बुनने से एक मजबूत कपड़ा तैयार होता है, ठीक वैसे ही आतंकवादियों का भी अपना एक ताना-बाना और नेटवर्क होता है। अगर हम उस नेटवर्क के किसी भी एक कमजोर धागे (कड़ी) को पकड़कर खींच लें, तो पूरा का पूरा आतंकी नेटवर्क ताश के पत्तों की तरह ढह जाता है।
